हल्द्वानी: एसटीएच में लगी आग, अग्निशमन टीम के सामने नर्स ने बुझाई आग
हल्द्वानी,अमृत विचार। अग्निशमन विभाग ने डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल में आग लगने की मॉक ड्रिल कर डॉक्टरों व अन्य स्टाफ को आग को काबू करने का प्रशिक्षण दिया। शुक्रवार को एसटीएच परिसर में अग्निशमन विभाग की एक टीम ने मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस अवसर पर दवाओं के खाली बॉक्सों में आग लगाकर …
हल्द्वानी,अमृत विचार। अग्निशमन विभाग ने डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल में आग लगने की मॉक ड्रिल कर डॉक्टरों व अन्य स्टाफ को आग को काबू करने का प्रशिक्षण दिया।
शुक्रवार को एसटीएच परिसर में अग्निशमन विभाग की एक टीम ने मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस अवसर पर दवाओं के खाली बॉक्सों में आग लगाकर बुझाने के बारे में बताया गया। अग्निशमन अधिकारी मनिंदर सिंह ने बताया कि आग लगने की मुख्य वजहें लकड़ी, कपड़ा, घरेलू गैस, डीजल, अन्य ज्वलनशील पदार्थ और इलेक्ट्रिसिटी शार्ट सर्किट हैं।
उन्होंने कहा कि शार्ट सर्किट से आग लगी हो तो बिजली के उपकरणों पर पर पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। बल्कि अस्पताल में मौजूद फायर एक्सटिंग्शर का इस्तेमाल करना चाहिए। यह भी बताया कि मोनो अमोनियम फॉस्फेट केमिकल का उपयोग सभी प्रकार की आग बुझाने में कर सकते हैं।
रवि पाल (उपप्रबन्धक विद्युत) मेडिकल कॉलेज ने बताया कि अस्पताल में फायर कंट्रोल रुम बनाया गया है और फायर अलार्म सिस्टम लगे हुए हैं जो 40 डिग्री से ज्यादा तापमान होने पर काम करते हैं । सभी जरूरी स्थानों पर फायर एक्सटिंग्शर लगाए गए हैं जिनमें मोनो अमोनियम फॉस्फेट केमिकल हैं जो किसी भी आग पर काम करता है। उन्होंने कहा कि यदि आग लगे तो कर्मचारी तुरंत मुख्य विद्युत केंद्र को इसकी सूचना दें ताकि बिजली आपूर्ति बंद की जाए।
एसटीएच के एमएस डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि पूर्व में कोलकाता में एक निजी अस्पताल में भीषण अग्निकांड हुआ था। इसमें स्टाफ और मरीज को जान से हाथ धोना पड़ा था। उन्होंने बताया कि ऐसी दुर्घटनाओं से बचने के लिए समय-समय पर अग्निशमन यन्त्रों को चेक किया जाना और मॉक ड्रिल कराना जरूरी है। इस दौरान एसटीएच के डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, गार्ड आदि मौजूद थे।
