कीमतों में बेजा वृद्धि
कोरोना महामारी के दौरान बिगड़े आर्थिक हालात धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहे हैं। महामारी की वजह से आपूर्ति बाधित हुई थी, जिसका सबसे अधिक नुकसान छोटे उद्यमों को हुआ। अब आर्थिक गतिविधियों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। इसके बावजूद आम आदमी की परेशानी थमने का नाम नहीं ले रही है। लोगों का आमदनी …
कोरोना महामारी के दौरान बिगड़े आर्थिक हालात धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहे हैं। महामारी की वजह से आपूर्ति बाधित हुई थी, जिसका सबसे अधिक नुकसान छोटे उद्यमों को हुआ। अब आर्थिक गतिविधियों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। इसके बावजूद आम आदमी की परेशानी थमने का नाम नहीं ले रही है। लोगों का आमदनी और बचत के लिए संघर्ष अभी भी जारी है। मंगलवार को लगातार आठवें दिन पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई। दिल्ली में पेट्रोल 89.29 रुपये चला गया। डीजल भी 79.70 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया।
पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब तक के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी हैं। नए साल में 20 दिनों के दौरान ही डीजल 5.83 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। बीते दिनों घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में भी 50 रुपये की बढ़ोतरी हुई। पड़ोसी देशों-पाकिस्तान में भारत से आधे रेट पर पेट्रोल मिल रहा है। भूटान, नेपाल जैसे हमसे गरीब देशों में पेट्रोल-डीजल भारत के मुकाबले बेहद सस्ता है।
हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी या कमी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और डॉलर एक्सचेंज के रेट पर भी निर्भर करती है। भारत में तेल महंगा होने का कारण है, इस पर लगने वाला अत्यधिक टैक्स। इस पर केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी लगाने के अलावा राज्य सरकारें भी वैट लगाकर धन कमाती हैं। राज्यों के वैट का रेट भी अलग-अलग होता है।
पूरे देश में सबसे ज्यादा वैट राजस्थान सरकार वसूलती है। यहां 38 प्रतिशत टैक्स पेट्रोल पर और 28 डीजल पर लगता है। राज्यों में यह स्थिति अलग-अलग रहती है। डीलर का औसतन कमीशन 3.67 रुपये को भी जोड़कर पेट्रोल का भाव गत माह 84.70 रुपये प्रति लीटर था। यानी एक लीटर पेट्रोल पर 52.53 रुपये का टैक्स देना पड़ा। वहीं पेट्रोल पंप किसी ऑयल डिपो से कितना दूर है, उसके हिसाब से उस पर किराया लगता है। इसके कारण शहर बदलने के साथ ये किराया बढ़ता-घटता है।
देश में ईंधन की ऊंची कीमतों का असर महंगाई पर पड़ेगा, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होगा। केंद्र सरकार के लिए यह संतोषजनक है कि महंगाई अभी भी निर्धारित लक्ष्य सीमा के अंदर ही है। हालांकि, करों में कटौती कर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी लाने की मांग विपक्ष द्वारा की जा रही है। ईंधन की कीमतों में जारी बढ़त का असर थोक और खुदरा बाजार पर होगा, जिससे उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुओं की महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।
