बरेली: डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से हाहाकार
अमृत विचार, बरेली। कोरोना काल में परेशान लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पिछले कई दिनों से लगातार बढ़ रही डीजल की कीमतों से माल भाड़े में बढ़ोत्तरी हो गई है। इससे रोजमर्रा में शामिल वस्तुओं समेत लगभग हर वस्तु महंगी हो गई है। निर्माण सामग्रियों की कीमतों में 20 प्रतिशत तक इजाफा हुआ …
अमृत विचार, बरेली। कोरोना काल में परेशान लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पिछले कई दिनों से लगातार बढ़ रही डीजल की कीमतों से माल भाड़े में बढ़ोत्तरी हो गई है। इससे रोजमर्रा में शामिल वस्तुओं समेत लगभग हर वस्तु महंगी हो गई है। निर्माण सामग्रियों की कीमतों में 20 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है। लोगों का आवागमन भी महंगा हो गया है। एक मार्च के बाद माल-भाड़े में और बढ़ोतरी होने की बात कही है।
चार महीने में डीजल 10 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है। नवंबर में डीजल 70.83 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था। फरवरी में फिलहाल डीजल की कीमत 81.35 रुपये हो गई है। डीजल के दाम बढ़ने से भवन निर्माण सामग्रियों (गिट्टी, मोरंग, ईंट, सरिया) की कीमतें 30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। वहीं, सबसे ज्यादा मार किचन पर पड़ी है।
सब्जी, राशन से लेकर खाद्य तेलों तक की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हुई है। नई फसल की आवक के बावजूद दालों की कीमतों में भी कमी नहीं आई, क्योंकि उसमें माल भाड़ा जोड़ दिया जा रहा है। आलू और प्याज के दामों में इजाफा होने का एक कारण डीजल का बढ़ा हुआ दाम भी है। जानकार बताते हैं कि कुछ चीजों की ढुलाई के लिए भाड़े में वृद्धि हुई है, जबकि कुछ मामलों में कंपनियों ने अपने फ्राइट ऑन रोड (एफओआर) में बढ़ोतरी कर दी है।
इसका मतलब है कि उत्पाद बनाने वाली कंपनी से माल पहुंचाने में जो खर्च आ रहा है, उसे भी वस्तु की कीमत में जोड़ दिया जा रहा है। इस तरह माल भाड़ा भले ही घोषित तौर पर नहीं बढ़ा है, लेकिन वसूला जा रहा है। इसकी कीमत उपभोक्ताओं को ही चुकानी पड़ रही है।
एफओआर में पांच से सात हजार रुपये का इजाफा
व्यापार अंकित गुप्ता ने बताया घी, तेल, दाल और चावल का कारोबार करने वाली कंपनियां एफओआर सिस्टम पर काम करती हैं। इसके तहत कंपनी से थोक विक्रेता की दुकान या गोदाम तक पहुंचाने में ट्रांसपोर्ट पर जो खर्च आता है उसे भी वस्तु के मूल्य में जोड़ दिया जाता है। इस वजह से उत्पाद की कीमतें बढ़ जाती हैं। तीन माह पहले दिल्ली से दस टन वाली गाड़ी जितने किराये में बरेली आ जाती थी, अब उसमें पांच से सात हजार रुपये (एफओआर) का इजाफा हो गया है।
नई फसल आने के बावजूद दाल के दाम नहीं घटे
सरसों का तेल दिसंबर में 128 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा था। अब थोक में रेट 152 रुपये प्रति लीटर है। इसी तरह दाल की कीमतों में नई फसल की आवक के बावजूद कमी नहीं आई है। सभी कंपनियों ने एफओआर में पांच से सात हजार रुपये का इजाफा कर दिया है। यह बढ़ोतरी डीजल की बढ़ी कीमतों की वजह से है।
बजरफुट 30 प्रतिशत, सरिया 40 फीसदी तक महंगी
बाजपुर से आने वाला बजरफुट पहले 110 रुपये क्विंटल की दर से बिक रहा था, अब इसकी कीमत बढ़कर 130 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। हल्द्वानी का बजरफुट 140 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है। पहले यह कीमत 120 रुपये के आसपास थी। गिट्टी की कीमत में भी थोड़ी बढ़ोतरी है। 72 रुपये का रेट बढ़कर 76 रुपये हो गया है। वहीं लोकल सरिया जहां 42 रुपये और ब्रांडेड 62 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता था, अब उसकी कीमत बढ़कर 55 रुपये और 75-76 रुपये हो गई है।
ईंट पर महंगाई, सीमेंट की कीमत दे रही राहत
इन दिनों भवन निर्माण समेत अन्य सामग्रियां भले ही महंगी हो, लेकिन सीमेंट की कीमत राहत भरी है। लाकडाउन से पहले और अभी की कीमतों में कोई ज्यादा अंतर नहीं। जबकि ईटों की कीमत पर जबदरस्त महंगाई है। एक नंबर की ईट 5200 रुपये बढ़कर 6200 रुपये तक पहुंच गई है। जबकि दो नंबर की ईट का भाव 4500 से बढ़कर करीब पांच हजार पहुंच गया है। हालाकि ईट की मांग पहले की तुलना में अब काफी कम है क्यों कि सरकारी कार्यों में ईंट का इस्तेमाल कम हो गया है। सड़कें इंटरलॉकिंग या सीसी बनने लगीं। मकान की नींव में भी अब ईंट का इस्तेमाल नहीं होता।
कुल लागत में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी
आर्किटेक्ट इंजीनियर राजीव ने बताया कि सामान्य तौर पर भवन निर्माण के दो पक्ष होते हैं। ढांचा खड़ा करना और फिनिशिंग। ढांचा खड़ा करने की लागत में तकरीबन 20 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन, फिनिशिंग मैटेरियल और लेबर कास्ट में थोड़ी कमी आई है। इसके बावजूद निर्माण लागत में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पहले अगर किसी मकान के निर्माण में 10 लाख रुपये की लागत आती थी, अब उसके लिए कम से कम 11.50 लाख खर्च करने होंगे।
एक मार्च से 20 प्रतिशत माल-भाड़े में होगी बढ़ोतरी
ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष शोभित सक्सेना ने बताया कि पिछले चार महीनों में डीजल की कीमतों में दस रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हो गई है। इस वजह से परिवहन में नुकसान झेलना पड़ रहा है। सरकार अगर अब भी गंभीर नहीं हुई तो एक मार्च से माल-भाड़े में 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी तय है। डीजल के अलावा सीएनजी से चलने वाली गाड़ियों के मालभाड़े में भी बढ़ोतरी होगी।
