पर्यावरणीय सुधार
संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की ओर से पर्यावरण सुधार के लिए 2050 तक की समय सीमा को अिधक बताया गया और इसका लक्ष्य हासिल करने के लिए अभी से प्रयास शुरू किए जाने का सुझाव दिया गया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का यह सुझाव बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के सारे देशों को इस सुझाव …
संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की ओर से पर्यावरण सुधार के लिए 2050 तक की समय सीमा को अिधक बताया गया और इसका लक्ष्य हासिल करने के लिए अभी से प्रयास शुरू किए जाने का सुझाव दिया गया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का यह सुझाव बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के सारे देशों को इस सुझाव पर अमल करना चाहिए और पर्यावरण सुधार के लिए जितना जल्दी हो सके प्रयास शुरू कर देने चाहिए। पर्यावरण को लेकर चिंता किसी एक देश की नहीं है, पूरी दुनिया ही इसके गंभीर संकट से जूझ रही है।
दुनिया भर के वैज्ञािनक चेताते आ रहे हैं कि अगर पर्यावरण सुधार के लिए जल्द से जल्द सुधार नहीं किए गए तो बहुत जल्द हालात घातक होंगे इसलिए पेरिस में हुए समझौते के मुतािबक, 2050 तक दुनिया में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से भी कई बार पर्यावरण के खराब होते हालात पर चिंता जताई जा चुकी है। उसकी ओर से पर्यावरण पर हालिया चर्चा इसी चिंता की कड़ी में कराई गई है, जिसमें भारत के पर्यावरण एवं वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि पर्यावरण सुधार के लक्ष्यों को हािसल करने के लिए 2050 की लंबी समय सीमा तय नहीं होनी चाहिए।
जावड़ेकर की बात तािर्कक है। पर्यावरण पर गहरे खतरे के दुष्परिणाम हम सब दुनिया भर में देख रहे हैं। देश-दुनिया मेें आ रहीं प्राकृतिक आपदाएं इसका ही कारण हैं। उत्तराखंड के चमोली जिले में हुई ग्लेशियर त्रासदी भी पर्यावरण को हािन पहुंचाने का ही कारण मानी जा रही है। पेड़ों के अंधाधुंध कटान से लगातार जंगल कम होते जा रहे हैं। शहरीकरण की होड़ बढ़ रही है। गांव खत्म होते जा रहे हैं। इससे निकट भविष्य में ही ऑक्सीजन का संकट गहराएगा।
ऐसे में, पर्यावरण सुधार के लिए किए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में बहुत देरी और ज्यादा ही नुकसानदायक साबित होगी। वैसे, पर्यावरण संरक्षण के लिए हर देश अपने स्तर से कार्य कर रहा है लेकिन यह प्रयास नाकाफी हैं। ऐसे में, सभी देशों की ओर से संयुक्त प्रयास के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए जाएंगे तभी हल निकलेगा। ऐसी स्थिति में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भारत का सुझाव मानते हुए पर्यावरण सुधार के लक्ष्य को 2050 से घटाकर जितना जल्दी संभव हो पाने के प्रयास में जुटना चाहिए। इस लक्ष्य में देरी अच्छी नहीं होगी।
