तो अब लावारिस शवों की नहीं होगी दुर्गति

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बरेली, अमृत विचार। लावारिश शवों की दुर्गति न हो इसके लिए शासन ने अंतिम संस्कार की राशि को बढ़ा दिया है। शासन ने इसके लिए 3400 रुपए निर्धारित किए हैं। बरेली जिले में ही प्रति वर्ष करीब 100 से अधिक लावारिश शवों का पुलिस अंतिम संस्कार कराती है। धनराशि बढ़ने के बाद पुलिस भी किसी तरह …

बरेली, अमृत विचार। लावारिश शवों की दुर्गति न हो इसके लिए शासन ने अंतिम संस्कार की राशि को बढ़ा दिया है। शासन ने इसके लिए 3400 रुपए निर्धारित किए हैं। बरेली जिले में ही प्रति वर्ष करीब 100 से अधिक लावारिश शवों का पुलिस अंतिम संस्कार कराती है। धनराशि बढ़ने के बाद पुलिस भी किसी तरह के बहाने नहीं बना सकेगी।

अक्सर देखा गया है कि जब भी किसी थाना एरिया में कोई लावारिश शव मिलता है तो पुलिस परेशान हो जाती है। क्योंकि पुलिस को सबसे पहले शव को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाना होता है। उसके बाद पहचान न होने की वजह से उसका अंतिम संस्कार भी श्मसान घाट या सुपर्द-ए-खाक कब्रिस्तान में कराती है।

पुलिस को पोस्टमार्टम हाउस पर भी रुपए खर्च करने पड़ जाते हैं। कई पुलिसकर्मी संस्थाओं के जरिए अंतिम संस्कार करा देती हैं। अंतिम संस्कार के लिए पुलिस को पहले से रकम मिलती है लेकिन पहले काफी कम रकम मिलती थी। इसकी वजह से पुलिसकर्मी अंतिम संस्कार कराने से कतराते थे। समय की मांग के आधार पर इसे बढ़ाया गया था। अब एक बार फिर से रकम को बढ़ा दिया गया है। पुलिसकर्मी शिकायत करते थे कि अंतिम संस्कार की रकम आसानी से नहीं मिलती है।

शासन ने मर्यादित तरीके से अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित 3400 रुपयों में से 6 मीटर कफन के कपड़े के लिए 400 रुपये, शव जलाने या फिर कब्र में दफनाने के लिए 2500 रुपये और शव को शव स्थल से पोस्टमार्टम हाउस ले जाने और पोस्टमार्टम हाउस से श्मसान घाट या कब्रिस्तान ले जाने के लिए 500 रुपये निर्धारित किए हैं। शासन ने स्पष्ट किया है जिन जिलों में शव वाहन मौजूद हैं और वहां शव को शव वाहन से ले जाया जाता है तो 500 रुपये का किराया नहीं मिलेगा।

आवामी खिदमत कमेटी के शाकिर यार खान ने बताया कि बीते वर्ष करीब 180 शवों को सुपुर्द-ए-खाक किया है। जिसमें कुछ शवों को पोस्टमार्टम हाउस से लेकर गए थे। बरेली विकास मंच के अजय अग्रवाल ने बताया कि पिछले वर्ष करीब 200 शवों का अंतिम संस्कार किया जिसमें कई पोस्टमार्टम हाउस पर आयी लावारिश थे।

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