हल्द्वानी: इंटर पास युवक ने नौकरी लगाने के नाम पर 20 लोगों को लगाया 10 लाख का चूना
हल्द्वानी, अमृत विचार। सेना के भूतपूर्व मेजर से नौकरी के झांसे में ठगी करने वाले आरोपी को नैनीताल एसओजी और कोतवाली की संयुक्त टीम ने नोएडा कार्यालय में छापा मार गिरफ्तार कर लिया। महज इंटरमीडिएट पास आरोपी अभी तक नौकरी के झांसे में 20 लोगों से 10 लाख से अधिक ठगी कर चुका था। नैनीताल …
हल्द्वानी, अमृत विचार। सेना के भूतपूर्व मेजर से नौकरी के झांसे में ठगी करने वाले आरोपी को नैनीताल एसओजी और कोतवाली की संयुक्त टीम ने नोएडा कार्यालय में छापा मार गिरफ्तार कर लिया। महज इंटरमीडिएट पास आरोपी अभी तक नौकरी के झांसे में 20 लोगों से 10 लाख से अधिक ठगी कर चुका था।
नैनीताल पुलिस के मीडिया सेल ने शुक्रवार शाम मामले का खुलासा किया। बताया कि पिछले वर्ष 9 दिसबंर को ग्राम करायल जौलासाल निवासी भुवन चंद्र भट्ट ने नौकरी के झांसे में 30 हजार रुपये ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। दरअसल पूर्व फौजी ने नौकरी के लिए एक विख्यात ऑनलाइन कंपनी में आवेदन किया था। इसके बाद कथित रूप से कंपनी की ओर से नौकरी लगाने और रजिस्ट्रेशन के एवज में उनके खाते में रकम डालने को कहा गया।
पूर्व फौजी इसके झांसे में आ गया। इधर, घटना की जांच-पड़ताल करते हुए नैनीताल एसओजी और कोतवाली की पुलिस ठगी के सूत्रधार तक जा पहुंची। पुलिस ने बताया कि आरोपी रवि जैन को नोएडा स्थित कार्यालय में छापामार गिरफ्तार कर लिया गया। उसके कब्जे से लैपटॉप, वाईफाई राउटर, छह मोबाइल फोन, नौ एटीएम कार्ड, दो लाख से अधिक नकदी आदि बरामद हुए। खुलासा करने वाली पुलिस टीम में एसओजी के प्रभारी निरीक्षक मनोज रतूड़ी, कोतवाली के दारोगा संजीत राठौड़, सिपाही दीपक अरोड़ा, वीरेंद्र चौहान, सुनीता थे।
पूर्व फौजी की जागरूकता और पुलिस की तत्परता से खुला भेद
हल्द्वानी। आरोपी अभी तक नौकरी का झांसा देकर 20 लोगों से 10 लाख से अधिक रकम ठग चुका था। ठगी का पूरा धंधा खुद संचालित करता था। वह जॉब सर्चिंग कंपनियों की वेबसाइट से बेरोजगारों का बायोडेटा अपलोड करता। इसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से उन्हें फोन कर झांसे में लेकर अलग-अलग बैंक खातों में रुपया मंगाता। इसके बाद मोबाइल सिम बंद कर लेता। आरोपी की ठगी का धंधा पिछले तीन साल से चल रहा था। आवेदकों से बात करने के लिए उसने कई प्रीएक्टिवेटेड सिम भी खरीदे थे। छोटी रकम और कानूनी पचड़ों से बचने के लिए ठगी के पीड़ित सामने नहीं आते। लेकिन इस बार एक पूर्व फौजी की जागरूकता और पुलिस की तत्परता से उसका भेद खुल गया।
