बरेली: बीडीए के पास नहीं अवैध कॉलोनियों का सटीक डाटा
बरेली, अमृत विचार। पिछले दस से 12 सालों शहर में अवैध कॉलोनियों की भले ही भरमार हो गई हो लेकिन बीडीए के रिकार्ड में इनका कोई सटीक लेखा-जोखा ही नहीं है। ऐसे में इन कॉलोनियों को लेकर कार्रवाई करना तो दूर बीडीए के पास अभी इन कॉलोनियों के नाम भी उपलब्ध नहीं हैं। इसकी वजह …
बरेली, अमृत विचार। पिछले दस से 12 सालों शहर में अवैध कॉलोनियों की भले ही भरमार हो गई हो लेकिन बीडीए के रिकार्ड में इनका कोई सटीक लेखा-जोखा ही नहीं है। ऐसे में इन कॉलोनियों को लेकर कार्रवाई करना तो दूर बीडीए के पास अभी इन कॉलोनियों के नाम भी उपलब्ध नहीं हैं। इसकी वजह से बीडीए क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों के बसने पर भी शिकंजा नहीं कसा जा पा रहा है।
बताते हैं कि वर्ष 2008 में महानगर में 197 अवैध कॉलोनियों को चिन्हित किया गया था। उसके बाद से सर्वे ही नहीं हुए हैं। बीडीए की टीम केवल लोगों से मिलने वाली शिकायत या सूचना के आधार पर ही गाहे-बगाहे अवैध निर्माण को सील करने या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करके औपचारिकता निभा रहा है।
नियमानुसार बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) के क्षेत्र में भवन मालिकों को पहले नक्शा स्वीकृत कराना होता है। इसके बाद ही निर्माण कराया जा सकता है लेकिन शहर में अवैध कॉलोनियों की भरमार है। नक्शा पास कराए बगैर लोग मनमाने तरीके से भवनों का निर्माण करा रहे हैं। इससे बीडीए को नक्शा पास कराने के लिए मिलने वाली शुल्क की रकम नहीं प्राप्त हो पा रही है। इससे बीडीए को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
बीडीए के रिकार्ड में पिछले दस से बारह सालों में अवैध कॉलोनियों को लेकर कोई सर्वे ही नहीं हुआ है। इससे बीडीए के रिकार्ड में अवैध कॉलोनियों की संख्या अभी भी 197 ही दर्ज हैं। हालांकि, शासन ने पिछले साल शमन योजना 2020 के तहत अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए शमन शुल्क जमा कराया जाना था लेकिन सरकार की यह कवायद भी परवान नहीं चढ़ सकी है।
शहर में कई जगहों पर अवैध कॉलोनियों की भरमार
पिछले एक दशक के दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों में अवैध कॉलोनियों की भरमार हो चुकी है। पीलीभीत बाईपास रोड, सौ फुटा, वीर सावरकरनगर, डोहरा रोड, सीबीगंज, बदायूं रोड, शाहजहांपुर रोड सहित कई जगहों पर बिल्डर एक के बाद एक बीडीए से नक्शा पास कराए बिना कॉलोनियां विकसित कर रहे हैं। यहां दिन प्लाट से लेकर भवनों और दुकानों व शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की खूब खरीद फरोख्त हो रही है।
हालत यह है कि बीडीए की स्वीकृत कॉलोनियों के मुकाबले अवैध कॉलोनियां की संख्या कहीं ज्यादा हो गई है। इस पर अभी भी शिकंजा नहीं कसा जा पा रहा है। गौरतलब है कि इन अवैध कॉलोनियों में मानक के अनुसार न तो जल निकासी, सड़क, पार्क, पानी आदि की व्यवस्था है। ऐसे में यहां जलभराव सहित तमाम दूसरी समस्याएं बनी हुई हैं।
