यह कैसी योजना, एक भी कुपोषित बच्चों को नहीं मिली गाय
महिपाल गंगवार, बरेली। कुपोषित बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब पांच महीने पहले गोवंश सहभागिता योजना शुरू की थी। मकसद था गोशाला में रह रहीं दुधारू गायों को कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के परिजनों को देकर सेहतमंद बनाया जा सके। लेकिन जागरूकता का आभाव कहे या कुछ और जिले में …
महिपाल गंगवार, बरेली। कुपोषित बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब पांच महीने पहले गोवंश सहभागिता योजना शुरू की थी। मकसद था गोशाला में रह रहीं दुधारू गायों को कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के परिजनों को देकर सेहतमंद बनाया जा सके। लेकिन जागरूकता का आभाव कहे या कुछ और जिले में एक भी परिवार मुफ्त में भी गाय लेने का तैयार नहीं है।
विभागीय आंकड़ों में जनपद में पांच साल की उम्र तक 3570 अतिकुपोषित और 36 हजार के करीब कुपोषित बच्चे हैं। इनमें अभी तक मात्र 50 लोगों ने गाय लेने को आवदेन किया, उसमें भी किसी ने अभी तक गाय नहीं ली है। अफसरों का दावा है कृपोषित और अति कुपोषित बच्चों के घर-घर जाकर परिवारों को गाय गोद लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इतना ही गाय पालन पर प्रतिमाह उसके चारे के ऐवज में नौ सौ रुपये दिये जाने का प्रावधान है। लेकिन अधिकांश परिवार किन्हीं कारणों की वजह से गाय लेने को तैयार नहीं है।
डीपीओ डा. आरबी सिंह का कहना है विभाग पुरजोर कोशिश में लगा है अधिक से अधिक परिवार गाय पाले ताकि शासन को मंशा पर खरा उतर सके। इधर, विशेषज्ञ बताते हैं कि पांच वर्ष से कम उम्र के आधे से अधिक बच्चों की मौत का एक प्रमुख कारण मां और बच्चे में कुपोषण होना है। कुपोषण से प्रभावित जीवित बच्चों की भी प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे वह अक्सर बीमार रहते हैं और उनका विकास नहीं हो पाता। इसको देखते हुए योगी सरकार ने बच्चों का कुपोषण दूर करने और उनके सेहतमंद बनाने के उद्देश्य से गाय देने की योजना लागू की है।
शहर से किसी ने नहीं किया आवेदन
जानकारी के मुताबिक कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के अभिभावाकों की तरफ से आए आवेदनों में एक भी शहरी क्षेत्र का आवेदन नहीं है। इससे यह तो स्पष्ट है कि शहरी नहीं ग्रामीण क्षेत्र के लोग ही गाय लेने में रुची दिखा रहे हैं। वहीं शासन की प्राथमिकता वाली इस योजना में चंद आवेदन आने से अफसरों की टेंशन बढ़ी हुई है। यह आलम तब है जब योजना में इच्छुक परिवार को उनकी पसंद के तहत नजदीक की गोशाला से गाय दिलाने का प्रावधान किया गया है।
गाय न लेने की एक वजह यह भी
विभागीय सूत्रों का कहना है योजना के तहत सरकार ने गोशाला से गाय देने व इसके भरण पोषण को प्रतिमाह धनराशि देने का प्रावधान तो किया, लेकिन दुधारू गाय मिल सके इससे निगाहें फेर ली हैं। यही वजह है कुपोषित बच्चों के अभिभावक दुधारू गाय नहीं मिलने की वजह से योजना में रुची नहीं दिखा रहे हैं। दबी जुबान से कुछ अफसर भी इस बात को स्वीकार कर रहे, लेकिन नाम उजागर होने की वजह से खुलकर सामने आने से बचते नजर आये
कुपोषित बच्चों के परिवार वालों को मुफ्त में गाय लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, लेकिन अधिकांश लोग इसमें रूची नहीं दिखा रहे। करीब पचास लोगों ने गाय पालने की इच्छा जताई है। प्राप्त आवेदनों की सूची सीडीओ को भेज दी गई। आगे की प्रकिया वहीं से होगी। -डा. आरबी सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी
