जहरीली शराब

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Edited By Amrit Vichar
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उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले में जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत हो गई। प्रदेश में जहरीली शराब के कहर की यह पहली घटना नहीं है। पहले भी इस तरह की कई घटनाएं हो चुकी हैं। हर बार शराब के अड्डों पर छापामारी। शराब बनाने वालों की धरपकड़ और जिम्मेदार अफसरों के निलंबन …

उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले में जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत हो गई। प्रदेश में जहरीली शराब के कहर की यह पहली घटना नहीं है। पहले भी इस तरह की कई घटनाएं हो चुकी हैं। हर बार शराब के अड्डों पर छापामारी। शराब बनाने वालों की धरपकड़ और जिम्मेदार अफसरों के निलंबन की कार्रवाई करके औपचारिकता की पूर्ति कर ली जाती है लेकिन जहरीली शराब बनाए जाने पर कोई रोक नहीं लग पाती।

दो माह पहले जनवरी के प्रथम सप्ताह में बुलंदशहर के सिकंदरबाद थाना क्षेत्र के गांव जीतगढ़ी में जहरीली शराब से कई लोगों की मौतों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में कहीं भी ऐसी घटना होने पर बड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। कई पुलिस कर्मियों और आबकारी विभाग पर भी कार्रवाई की गई थी, लेकिन मीरजापुर की घटना से साफ है कि ऐसी घटनाएं फिर भी नहीं रुकीं। जबकि बुलंदशहर की घटना में मुख्यमंत्री के आदेश पर शराब माफिया के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई भी की गई थी।

जाहर है कि सरकार कितनी भी सख्ती कर ले, शराब माफिया पर कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है और जहरीली शराब के कहर का सिलसिला जारी है। सच यह है कि गांवों में अवैध रूप से बनाई जाने वाली जहरीली शराब पर प्रतिबंध के लिए पर्याप्त कानून हैं। सच तो यह है कि जिस थाना क्षेत्र में जहरीली शराब बनाई जाती है, वहां की पुलिस को उनके अड्डों की पूरी जानकारी होती है। कई नेताओं के संरक्षण में भी लोग अवैध शराब का धंधा करते हैं। सबकुछ जानते हुए भी पुलिस चुप्पी साधे रहती है और जहरीली शराब के कांड सामने आते रहते हैं। सरकार की सख्ती बेअसर रहती है।

बहरहाल, यूपी के मीरजापुर में इधर जहरीली शराब से मौतें हुई हैं और उधर, पंजाब में जहरीली शराब बेचने पर फांसी की सजा का कानून बनाया जा रहा है। पंजाब के राज्य मंत्रिमंडल ने पंजाब आबकारी एक्ट 1914 की धारा 61-ए दर्ज करने और धारा 61 व 63 में संशोधन की मंजूरी दे दी है। पंजाब विधानसभा के बजट सत्र में यह विधेयक लाया जाएगा जिसमें प्रदेश में जहरीली शराब बेचने पर फांसी का प्रावधान किया गया है। पंजाब सरकार ने यह फैसला अमृतसर, गुरदासपुर और तरनतारन में जहरीली शराब से हुई मौतों को देखते हुए लिया है।

हालांकि उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात में पहले से ही जहरीली शराब बनाने और बेचने पर फांसी की सजा का प्रावधान है लेकिन पुलिस और आबकारी विभाग के सिस्टम के रवैये से इस कानून के बाद भी उत्तर प्रदेश में जहरीली शराब का धंधा चल रहा है। ऐसे में सरकार को सिस्टम को मजबूत बनाना होगा।