बरेली: बिना जीएसटी पंजीकरण मनरेगा में काम कर रहीं 803 फर्में
अमृत विचार, बरेली। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहे हैं। पूर्व में सामने आए घोटालों के बाद भी ब्लॉक स्तर पर निर्माण सामग्री सप्लाई कर रही 1800 फर्मों में से अधिकांश नियम विरुद्ध तरीके से संचालित हो रही हैं। कुछ जनप्रतिनिधियों की शह …
अमृत विचार, बरेली। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहे हैं। पूर्व में सामने आए घोटालों के बाद भी ब्लॉक स्तर पर निर्माण सामग्री सप्लाई कर रही 1800 फर्मों में से अधिकांश नियम विरुद्ध तरीके से संचालित हो रही हैं।
कुछ जनप्रतिनिधियों की शह पर लंबे समय से गोलमाल चल रहा है। मामला संज्ञान में आने पर वाणिज्यकर विभाग जांच कर ऐसी फर्मों पर शिकंजा कसने का दावा कर रहा है।अभी तक मनरेगा में जॉब कार्ड धारकों से वसूली, दूसरे गांवों से श्रमिक बुलाकर काम कराने, फर्जी मस्टररोल बनाने जैसी शिकायतें आम थीं। इन पर भी प्रशासन की सख्ती कभी जांच से आगे नहीं बढ़ी।
वहीं, बीते कुछ सालों से आसपास के जिलों में खुद की फर्म बनाकर लाखों रुपये के घोटाले करने के मामले उजागर होने शुरू हो गए। इसके बाद यहां भी मामला तूल पकड़ गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिले के 15 ब्लॉकों पर कुल 1807 फर्म से निर्माण सामग्री की सप्लाई कराई जा रही है। कई फर्म जिम्मेदारों की होने का भी आरोप है।
इधर, जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सरकार ने 2015 से फर्म का जीएसटी पंजीकरण अनिवार्य कर दिया था। पहले से काम करती चली आ रही फर्म को भी इसके तहत पंजीकरण कराने के निर्देश दे दिए थे। तभी वह निर्माण सामग्री सप्लाई करने योग्य बन पाती है मगर इनमें 803 फर्में ऐसी हैं जिनका जीएसटी पंजीकरण ही नहीं है।
ऐसे में उनसे लेनदेन किस तरह से चल रहा था अब इसकी भी छानबीन करने की बात जिम्मेदार विभाग के अधिकारी कर रहे हैं। कार्रवाई के लिए निर्णय लेने से पूर्व नियमावली भी चेक कराई जा रही है। मनरेगा की साइट पर भी 1807 में सिर्फ 803 फर्में ही पंजीकृत निकली हैं। ऐसे में विभाग की भूमिका भी संदेहास्पद बनी हुई है। फिलहाल इतनी तस्वीर साफ हो गई है कि गोलमाल कम नहीं है।
