महिला दिवस : मुनीजा अपने साथ अन्य महिलाओं को भी बना रहीं आत्मनिर्भर
मुरादाबाद। पंखो से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। सपने उन्हीं के सच होते है, जिनके सपनों में जान होती है… यह शेर शहर की रहने वाले महिला मुनीजा पर बिल्कुल सटीक बैठता है। मुनीजा नाम है उस महिला का, जिसने पति की मौत के बाद न खुद के परिवार को पालना सीखा, …
मुरादाबाद। पंखो से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। सपने उन्हीं के सच होते है, जिनके सपनों में जान होती है… यह शेर शहर की रहने वाले महिला मुनीजा पर बिल्कुल सटीक बैठता है। मुनीजा नाम है उस महिला का, जिसने पति की मौत के बाद न खुद के परिवार को पालना सीखा, बल्कि अपने-अपने साथ अन्य महिलाओं को भी जीने का रास्ता दिखाया और उन्हे हुनर सिखाकर आत्मनिर्भर बना दिया।
थाना सिविल लाइंस क्षेत्र के हरथला की रहने वाली इस महिला ने अपनी हिम्मत और सोच की बदौलत न केवल खुद के लिए मुकाम हासिल किया, बल्कि सैकड़ों महिलाओं की जिंदगी भी बदल रही हैं। जीवन के 50 वसंत देख चुकीं मुनीजा का सफर आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि उनकी शादी कम उम्र में हो गई थी। पति पेंटर का काम करते थे, जिससे घर का खर्च चलना मुश्किल हो रहा था। ग्रामीण परिवेश में यह संभव न था।
लिहाजा मुनीजा गांव से निकलकर शहर में आई। यहां पर राष्ट्रीय रोजगार मिशन के जरिए बांस और मूंज से बनने वाली चीजों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। उसके बाद उन्होंने 2016 में स्वयं सहायता समूह तैयार किया। सरकारी सहायता और अपनी मेहनत के जरिए मुनीजा का काम एक मुकाम पर आया। धीरे-धीरे कई महिलायें इनके साथ जुड़ती चली गईं। आज लगभग 300 महिलाओं को उन्होंने अपने समूह से जोड़ रखा है, जो डलिया, टोकरी, सजावटी सामान, ऊन के स्वेटर, मास्क और अन्य सिलाई-कढ़ाई के सामान बनाती हैं। साथ ही अपने परिवार को भी संभालती हैं। मुनीजा की कहानी महिलाओं के लिए मिसाल पेश करती है।
सामान बेचने में हुई थी परेशानी
वह बताती हैं कि जब हमने अपने प्रोडक्ट को बाजार में बेचना चाहा तो तमाम तरह की समस्यायें सामने आईं। आफिसों के चक्कर लगाना शुरू किए। धीरे-धीरे काम बनने लगा। कोरोना काल में लाकडाउन लगा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत की सोच को आगे बढ़ाया। आज हम सब महिलायें आत्मनिर्भर हैं। बताती हैं कि आज हमारे पास न केवल आर्थिक आजादी है, बल्कि हम अपने जैसे औरों को भी हुनरमंद बना रहे हैं।
आत्मनिर्भर हुईं महिलायें
मुनीजा का कहना है कि आज उनका सामान एक जनपद-एक उतपाद में भी चयनित है। जो महिलायें उनसे जुड़ी हैं, उन्हें न केवल वह काम दिलवाती हैं, बल्कि पैसा भी दिलवाती हैं। समूह में काम करने का फायदा मिल रहा है। आज उनके पास बाजार है और मांग भी है। इसके कारण तमाम महिलायें अपनी जिंदगी बदल रही हैं और आत्मनिर्भर हो रही हैं।
-सलमान खान
