बरेली में साइबर ठगों ने 12 माह में 1.28 करोड़ रुपये ठगे

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अनिल कुमार, बरेली। साइबर अपराधी स्मार्टफोन के जरिए स्मार्ट तरीके से लोगों के बैंक अकाउंट खाली कर रहे हैं। स्मार्ट फोन से एक कॉल, मैसेज या फिर ईमेल के जरिये कुछ मिनटों में रकम पार कर रहे हैं। उन्हें कोई पकड़ने वाला नहीं है। जब तक लोग साइबर सेल में शिकायत करते हैं तब तक …

अनिल कुमार, बरेली। साइबर अपराधी स्मार्टफोन के जरिए स्मार्ट तरीके से लोगों के बैंक अकाउंट खाली कर रहे हैं। स्मार्ट फोन से एक कॉल, मैसेज या फिर ईमेल के जरिये कुछ मिनटों में रकम पार कर रहे हैं। उन्हें कोई पकड़ने वाला नहीं है। जब तक लोग साइबर सेल में शिकायत करते हैं तब तक काफी देर हो चुकी होती है। वर्ष 2020 में ही साइबर अपराधियों ने बरेली के 394 लोगों से 1 करोड़ 28 लाख रुपये बिना धमकाए लूट लिए और पुलिस भी कुछ नहीं कर सकी।

साइबर सेल ने मामलों में जांच शुरू कर कार्रवाई की लेकिन सिर्फ 64 लोगों के ही 19 लाख 35 हजार रुपये खातों में वापस करा सकी। यह रकम खातों से गई रकम का सिर्फ 7 फीसदी है। पुलिस के अनुसार, 1,28,68,927 रुपये साइबर ठगों ने बरेलीवासियों के खातों से उड़ाए हैं। यह वह मामले हैं जो साइबर सेल में पहुंचे हैं। इसके अलावा कुछ मामले ऐसे भी हैं जो सीधे थाने में गए और उनकी रिपोर्ट दर्ज हुई और कुछ साइबर थाने में भी दर्ज किए गए। इसके अलावा कई लोगों ने पुलिस से शिकायत भी नहीं की होगी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रतिवर्ष साइबर ठग लोगों के कितनी आसानी से अकाउंट खाली कर दे रहे हैं।

दिसंबर 2020 की बात करें तो साइबर ठगों ने 36 लोगों के अकाउंट खाली किए जिनमें तुलाशेरपुर निवासी अजय के खाते से 76 हजार रुपये, साहूकारा निवासी राजपाल सिंह के खाते से 36 हजार रुपये, आनंद विहार निवासी नागेंद्र के खाते से एक लाख रुपये, अंबेडकर नगर निवासी धर्मवीर के 1 लाख 96 हजार रुपये व अन्य हैं। इसी तरह से नवंबर में कोतवाली निवासी विपिन कुमार के खाते से डेढ़ लाख रुपये, बृजवाशी कॉलोनी निवासी आशा यादव के खाते से एक लाख 20 हजार रुपए गायब कर दिए। यह सूची लंबी है। किसी के खाते से कम रकम तो किसी से बड़ी रकम निकल गई।

दिसंबर की बात करें दिव्यांशु के ही अकाउंट से 1900 रुपये गायब, हर्षित मिश्रा के खाते से गायब 10500 में से 6500 रुपये, अभिनव सिंह के खाते से कटे 5600 में से 5 हजार रुपये, मुकेश कुमार के खाते से कटे 23500 रुपये में से 1400 रुपये और सुनीता सिंह के खाते से कटे 75 हजार में से सिर्फ 4500 रुपये ही वापस कराए जा सके।

अलग-अलग तरीकों से ठगी
साइबर ठग हर बार ठगी का नया तरीका इजाद कर लेते हैं। कभी रिश्तेदार बनकर, कभी फौजी बनकर तो कभी बैंककर्मी बनकर ठगी करते हैं। नौकरी लगवाने, शादी करवाने या अन्य योजना का लाभ दिलाने के नाम पर भी ठगी होती है। जब भी कोई स्कीम शुरू होती है तो उसके नाम पर ठगी शुरू कर देते हैं। लोग चालच में आकर रकम दे देते हैं। कई लोगों के तो अकाउंट से सिर्फ लिंक पर क्लिक करने से ही रुपये कट जाते हैं। ऐसा लिंक के जरिए मालवेयर भेजकर फोन को ऑपरेट करके किया जाता है। जिसका मोबाइल धारक को पता भी नहीं चलता है। साइबर सेल रुपये इसलिए भी वापस नहीं करा पाती है, क्योंकि रकम तो तुरंत कई खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है। जांच में खाता भी फर्जी आता है और मोबाइल नंबर भी। गलती से ठग ट्रेस भी हो जाए तो जिले से दूसरे राज्य में जाकर पकड़ना मुश्किल काम होता है।

डॉक्टर का फर्जी अकाउंट बनाकर ठगी का प्रयास
साइबर ठगों ने बरेली के एक निजी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर की फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर ठगी का प्रयास किया। ठग ने डॉक्टर राजेश वर्मा की फर्जी आईडी बनाकर उनकी फ्रेंड लिस्ट में जुड़े लोगों से मदद के नाम पर रुपये मांगने शुरू कर दिए। एक दोस्त से 15 हजार रुपये की मांग की। जब दोस्तों ने डॉक्टर से इस बारे में पूछा तो उन्हें इसका पता चला। जिसके बाद उन्होंने अपनी असली फेसबुक आईडी पर मैसेज डालकर लोगों को जानकारी दी।

तुरंत शिकायत पर बचाए 3 लाख रुपये
साइबर ठगों ने रविवार को यूपी 112 पर तैनात सिपाही मनोज कुमार के खाते से ही 3,32088 रुपये उड़ा दिए। मनोज कुमार तुरंत पुलिस लाइंस स्थित साइबर थाना में पहुंचे। यहां पर एसआई शशांक सिंह ने तुरंत कार्रवाई शुरू की तो उनके खाते से कटे सभी रुपये वापस करा लिए गए।

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