बरेली: 135 किमी सीवर लाइन बिछाने से इनकार, वापस होगा बजट
अनूप गुप्ता, बरेली। अमृत योजना में प्रस्तावित करीब 135 किलोमीटर लंबी ब्रांच सीवर लाइन को बिछाने से जलकल विभाग ने इनकार कर दिया है। विभागीय इंजीनियरों का कहना है कि सीवर की यह ब्रांच लाइन सही और चालू अवस्था में है। इसलिए इसे बदलना उचित नहीं है बल्कि इसे बिछाने के लिए खर्च होने वाली …
अनूप गुप्ता, बरेली। अमृत योजना में प्रस्तावित करीब 135 किलोमीटर लंबी ब्रांच सीवर लाइन को बिछाने से जलकल विभाग ने इनकार कर दिया है। विभागीय इंजीनियरों का कहना है कि सीवर की यह ब्रांच लाइन सही और चालू अवस्था में है। इसलिए इसे बदलना उचित नहीं है बल्कि इसे बिछाने के लिए खर्च होने वाली धनराशि को अमृत योजना के किसी दूसरे काम में लगा दिया जाए।
जलकल विभाग के महाप्रबंधक की ओर से इसकी रिपोर्ट भी नगर आयुक्त और जल निगम के अधिशासी अभियंता को भेज दी गई है। इधर, जल निगम के अधिकारियों का कहना है कि सीवर की ब्रांच लाइन बिछाने की अनुमति जलकल विभाग को ही देनी थी लेकिन उनके इंकार करने से अब यह आकलन किया जा रहा है कि इस लाइन को न बिछाने पर अमृत योजना का कितना बजट बच रहा है। इसे वापस सरकार को भेज दिया जाएगा।
अमृत योजना के माध्यम से बरेली सीवरेज योजना सेंट्रल जोन फेस-तीन में शहर के सिकलापुर, कालीबाड़ी, खुर्रम गौटिया सहित विभिन्न हिस्सों में 173.25 किलोमीटर लंबी सीवर की ब्रांच लाइन बिछाने का प्रस्ताव था। सीवर लाइन के लिए जल निगम मेन ट्रंक लाइन बिछाता है जबकि उसमें छोटी-छोटी ब्रांच लाइनों को नगर निगम का जलकल विभाग जोड़ता है।
जलकल विभाग ने इतनी बड़ी लंबाई में ब्रांच सीवर लाइन बिछाने से पहले पूर्व में बिछी लाइनों का सत्यापन किया। जलकल विभाग के इंजीनियरों ने पाया कि पहले से बिछी 134.788 किलोमीटर लंबी सीवर ब्रांच लाइन सही और चालू अवस्था में हैं। इसलिए इनकी थोड़ी-बहुत मरम्मत के बाद उसे ठीक कराया जा सकता है।
हालांकि, सत्यापन में अवशेष 64.59 किलोमीटर लंबी सीवर ब्रांच लाइन की स्थिति खराब मिली। इसलिए उसे अमृत योजना के माध्यम से ठीक कराने की अनुमति दे दी गई। जलकल विभाग के महाप्रबंधक राजेश कुमार यादव ने इसकी रिपोर्ट बनाकर जल निगम के अधिकारियों के साथ नगर आयुक्त अभिषेक आनंद को भी बनाकर भेज दी है। इसके बाद करीब 135 किलोमीटर लंबी सीवर ब्रांच लाइन बिछाने के काम को निरस्त कर दिया है।
महाप्रबंधक जलकल की ओर से यह भी कहा गया है कि ब्रांच लाइन की धनराशि की रकम अमृत योजना के तहत सीवर ट्रंक लाइन या किसी दूसरे काम में खर्च की जा सकती है। वहीं, जल निगम के इंजीनियरों का कहना है कि 135 किलोमीटर ब्रांच सीवर लाइन बिछाई जाती तो इस पर कितना खर्च होता। इसके आकलन के बाद शेष बजट को सरकार को वापस भेजने की कार्रवाई होगी।
फैसला बदलने की एक वजह यह भी
अमृत योजना के तहत करीब 135 किलोमीटर लंबी ब्रांच सीवर लाइन को बदलने का फैसला जलकल विभाग ने लिया है। विभागीय अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट में यह भी बताया है कि नई सीवर लाइन बिछाने से शहर के बहुत बड़े हिस्से की सड़कों की खुदाई करनी पड़ेगी। इससे पूरी व्यवस्था चौपट हो जाएगी। इससे बड़े पैमाने पर पेयजल पाइप लाइनें, टेलीफोन सहित अन्य सर्विस लाइनों के भी नुकसान पहुंचने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। इससे जनता को लंबे समय तक दुश्वारियां झेलनी होंगी। चूंकि पूर्व में बिछीं लाइनें ठीक हैं। उनकी मरम्मत कर उन्हें चालू रखने में कोई नुकसान नहीं है।
करीब 13 किलोमीटर बिछाई जा रही सीवर की मेन ट्रंक लाइन
अमृत योजना के तहत कालीबाड़ी, श्यामगंज, चौपुला, चौकी चौराहा, गांधी उद्यान, बियावानी कोठी सहित शहर की अन्य जगहों पर करीब 13 किलोमीटर लंबी सीवर की मेन ट्रंक लाइन बिछाई जा रही है। बाद में इसमें छोटे-छोटे इलाकों की ब्रांच लाइन को जोड़ा जाता है। नई ब्रांच लाइन जल निगम बिछाता है जबकि पूर्व में बिछी ब्रांच लाइन अगर खराब हो गई है या वहां दूसरी लाइन बिछानी है तो यह काम नगर निगम का जलकल विभाग करता है।
करीब 135 किलोमीटर सीवर की ब्रांच लाइन जांच में ठीक पाई गई है, इसलिए उसकी जगह नई लाइन बिछाने की जरूरत नहीं है। इसकी जांच रिपोर्ट जल निगम को भेज दी गई है। -राजेश कुमार यादव, महाप्रबंधक, जलकल विभाग
जलकल विभाग से 135 किलोमीटर सीवर की ब्रांच लाइन को ठीक बताया गया है। इसका आकलन किया जा रहा है कि उक्त काम न करने पर कितना बजट अवशेष रहेगा। इसे सरकार को वापस भेज दिया जाएगा। -संजय कुमार, अधिशासी अभियंता, जल निगम
