रक्षा मंत्री की भारत यात्रा को लेकर बोले अमेरिकी सांसद, अमेरिका-भारत के बीच सामरिक भागीदारी आवश्यक

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वॉशिंगटन। अमेरिका के शीर्ष सांसदों ने रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन की अमेरिका के ”रणनीतिक भागीदार” भारत की पहली यात्रा का स्वागत किया है और चीनी आक्रामकता के बीच उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा एवं स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को उजागर किया। ऑस्टिन तीन देशों के यात्रा पर हैं। भारत की यात्रा …

वॉशिंगटन। अमेरिका के शीर्ष सांसदों ने रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन की अमेरिका के ”रणनीतिक भागीदार” भारत की पहली यात्रा का स्वागत किया है और चीनी आक्रामकता के बीच उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा एवं स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को उजागर किया। ऑस्टिन तीन देशों के यात्रा पर हैं। भारत की यात्रा पर जाने से पहले वह जापान और दक्षिण कोरिया की यात्रा पर थे।

डेमोक्रेटिक पार्टी के उपाध्यक्ष एवं सांसद फिलोमेन वेला ने ट्वीट किया, ”रक्षा मंत्री ऑस्टिन को सफल भारत दौरे के लिए बधाईयां।” हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में हिस्पैनिम सदस्य वेला ने कहा, ”हिंद-प्रशांत संबंधों को मजबूत करने की उम्मीद करता हूं।” ऊर्जा एवं वाणिज्य समिति के अध्यक्ष सांसद फ्रैंक पैलोन ने ऑस्टिन की भारत यात्रा का स्वागत किया।

उन्होंने कहा, ”मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि रक्षा मंत्री अपने सामरिक भागीदार भारत के साथ वार्ता कर रहे हैं। राष्ट्रपति बाइडन ने दिखाया है कि वह अमेरिका-भारत भागीदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि क्षेत्र में स्थायित्व को बढ़ावा दिया जा सके।” चीन के बढ़ते सैन्य दु:साहस के कारण हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर दुनिया के प्रमुख देश चिंतित हैं। चीन की बढ़ती आक्रामकता को रोकने के लिए अमेरिका क्वाड को मजबूत करने का पक्षधर है।

सांसद स्टीफन मर्फी ने एक ट्वीट में कहा कि वह उत्साहित हैं कि अमेरिका की विदेश नीति में गठबंधन को मजबूत बनाने के कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ”हिंद-प्रशांत में अपने हितों की रक्षा करने और चीनी आक्रामकता को रोकने के लिए ”क्वाड” सदस्यों — भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया के साथ काम करना जरूरी है।” सांसद एंथनी ब्राउन ने एक ट्वीट में भारत की सफल यात्रा के लिए रक्षा मंत्री ऑस्टिन को बधाई दी। उन्होंने कहा, ”क्षेत्र में सुरक्षा एवं स्थायित्व के लिए अमेरिका-भारत के बीच सामरिक भागीदारी आवश्यक है। इस संबंध को मजबूत करने से स्वतंत्र एवं खुले हिंद प्रशांत को और मजबूत किया जा सकता है।”

गौरतलब है कि चीन दक्षिण और पूर्वी चीन सागर में क्षेत्रीय विवाद में उलझा हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में उसने प्रायद्वीपों का सैन्यीकरण भी तेज किया है। बीजिंग संपूर्ण दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है लेकिन वियतनाम, मलेशिया, फिलीपीन, ब्रूनेई और ताईवान भी इन इलाकों पर दावे करते हैं। पूर्वी चीन सागर में चीन का जापान के साथ विवाद है।

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