चीन की हठधर्मिता
अमेरिका और चीन के बीच तल्खी बढ़ती ही जा रही है। अमेरिका को पछाड़कर वैश्विक महाशक्ति बनने में जुटा चीन हर स्तर पर इसके लिए जतन में जुटा हुआ है। अपने वर्चस्व के लिए वह हर फंडा अपनाता जा रहा है, बीजिंग से निकले कोरोना वायरस को दुनिया भर में फैलाने में भी उसकी भूमिका …
अमेरिका और चीन के बीच तल्खी बढ़ती ही जा रही है। अमेरिका को पछाड़कर वैश्विक महाशक्ति बनने में जुटा चीन हर स्तर पर इसके लिए जतन में जुटा हुआ है। अपने वर्चस्व के लिए वह हर फंडा अपनाता जा रहा है, बीजिंग से निकले कोरोना वायरस को दुनिया भर में फैलाने में भी उसकी भूमिका को लेकर सवाल लगातार उठते आ रहे हैं।
एक तरह जहां दुनिया कोरोना संक्रमण से जूझ रही है, वहीं चीन अपने साम्राज्य का विस्तार करने की भरसक कोशिश में जुटा हुआ है, इसलिए उसकी नियत और नीति पर शक बाजिव हो जाता है। पिछले साल कोरोना संक्रमण के बीच वह भारत की सीमा पर आक्रामक दिखा। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान और नेपाल को वह अपने इशारे पर नचा रहा है। पूरी दुनिया चीन की नियत को साफ देख-समझ रही है।
इधर, भारत और अमेिरका ने रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को और बढ़ाया है। भारत की यात्रा पर पहुंचे अमेिरका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ के बीच शनिवार को हुई वार्ता में सेंट्रल कमांड के साथ सहयोग पर सहमति बनी है। इससे भी पाकिस्तान के साथ चीन की बौखलाहट बढ़ती गई है।
अमेरिका और चीन के बीच शुक्रवार को समाप्त हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी चीन का रवैया अड़ियल रहा। इस बैठक के बाद अमेिरका ने बयान दिया कि उनकी ओर से चीन के समक्ष प्राथमिकताओं को साझा किया गया, तो चीन की ओर से बैठक में शामिल हुए सतारूढ़ कम्यूनिस्ट पार्टी के विदेश मामलों के निदेशक यांग जेईची ने बयान जारी किया कि चीन किसी भी मसले पर कदम पीछे करने का इरादा नहीं रखता। उनके इस बयान से चीन के अड़ियल मंसूबों को समझा जा सकता है। शुक्रवार को ही संयुक्त राष्ट्र संघ में चीन और अमेिरका के बीच टकराव भी दिख गया।
अंतरराष्ट्रीय नस्ली भेेदभाव उन्मूलन दिवस के कार्यक्रम में चीन और अमेरिका ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। अमेरिका ने कहा- चीन में उइगर मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यकों का नरसंहार हो रहा है तो चीन ने अमेिरका पर भेदभाव और नफरत फैलाने के आरोप मढ़े। इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय बैठकों में दोनों देशों के बीच नोकझोंक सामने आती रही है।
जाहिर है कि अमेिरका अपनी प्रभुसत्ता को चुनौती स्वीकार नहीं कर सकता और चीन अपने वर्चस्व को बढ़ाने के कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं है। यह टकराव निकट भविष्य में और बढ़ेगा लेकिन टकराव समाधान नहीं है। आज जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है और उसके समाधान और मानवता को बचाने के लिए सारे देशों को रास्ता खोजने की जरूरत है, ऐसे में चीन को अपने अड़ियल रवैये में सुधार लाना होगा। मानवता को बचाने के लिए पूरी दुनिया को एक होने की जरूरत है।
