अमरोहा: नसीम की टोपी से रंग बिरंगी होती है देशवासियों की होली
अमरोहा। शुभ होली की टोपी अमरोहा की गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल है। अमरोहा का मुस्लिम परिवार अपने हुनर के जरिए हाथों से होली की टोपियां बनाकर देश के अलग-अलग राज्यों में आपूर्ति कर हिंदुओं की होली में रंग भरते हैं। लेकिन हर साल की तरह इस बार नसीम की होली की टोपी पर कोरोना …
अमरोहा। शुभ होली की टोपी अमरोहा की गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल है। अमरोहा का मुस्लिम परिवार अपने हुनर के जरिए हाथों से होली की टोपियां बनाकर देश के अलग-अलग राज्यों में आपूर्ति कर हिंदुओं की होली में रंग भरते हैं। लेकिन हर साल की तरह इस बार नसीम की होली की टोपी पर कोरोना का ग्रहण लग गया है। बाजार में टोपी की मांग कम होने के चलते कारखाने में होली की टोपियों का स्टाक रखा है।
होली के त्यौहार पर अमरोहा की टोपी की जबरदस्त मांग रहती है। शहर के मोहल्ला बटवाल में मुस्लिम परिवार पिछले कई करीब 6 दशकों से हिंदुओं के लिए होली की टोपी तैयार करने का कार्य करते आए हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी यह कार्य चलता आ रहा है। अब नसीम बैग के हाथ से बनी होली की टोपी अमरोहा ही नहीं बल्कि कई जनपदों के अलावा देश के अलग अलग राज्यों में हिंदुओं के सिर चढ़कर बोलती है।
टोपियां साम्प्रदायिक सौहार्द और भाईचारे का भी प्रतीक है। नसीम बैग के साथ उनके परिवार की महिलाएं भी इस कार्य में उनका हाथ जुटाती है। होली से करीब छह महीने पहले परिवार के लोग हाथ से टोपियां बनाना शुरू कर देते हैं। इस पुश्तैनी काम के बारे में नसीम बेग बताते हैं कि हर साल करीब 10 लाख से अधिक टोपियां बाजार में सप्लाई की जाती हैं। लेकिन बीते वर्ष होली के बाद आई कोरोना महामारी के बाद से धंधा मंदा होता गया।
लाकडाउन लगने के बाद पिछले वर्ष का पूरा पेमेंट अभी तक नहीं मिल पाया। अब धीरे धीरे जिंदगी पटरी पर आते देख होली के लिए टोपी बनाई गई। लेकिन दोबारा से कोरोना की दहशत के चलते टोपी की मांग कम हो गई। अब कारखाने में होली की टोपी के चट्टे लगे हुए हैं। लाखों रूपये के नुकसान होने के चलते परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो रहा है।
चुनाव चिह्न की टोपियों से है भरपाई की उम्मीद
नसीम बेग का परिवार केवल होली ही नहीं बल्कि चुनाव के सीजन में भी राजनीतिक टोपियां बनाते हैं। देशभर के छोटे-बड़े नेता इस परिवार के हाथों की बनी टोपी पहनते हैं। नसीम बैग ने बताया कि पंचायत चुनाव के लिए अलग अलग चुनाव चिन्ह जैसे कुल्हाड़ी, कप प्लैट, ट्रेक्टर, कैतली, हल जोतता किसान, अनाज बरसाता किसान आदि की टोपियां बनानी शुरू कर दी हैं। उनका कहना है कि होली की टोपियांे से तो इस बार लाखों का नुकसान हो गया है। अब पंचायत चुनाव के लिए प्रचार प्रसार हेतू बनाई जा रहीं चुनाव चिह्न की टोपियों से कुछ भरपाई की उम्मीद है।
