बरेली: कैंसर और शुगर की बीमारी पर रिसर्च करेंगे रुविवि के प्रोफेसर
अमृत विचार, बरेली। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डाई से बालों में होने वाले कैंसर से बचाव, शुगर को ठीक करने वाले पौधे, कोरोना काल में महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव को लेकर अध्ययन करेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार की रिसर्च एंड डेवलपमेंट योजना 2020-21 के अंतर्गत विश्वविद्यालय के 9 शिक्षकों के रिसर्च …
अमृत विचार, बरेली। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डाई से बालों में होने वाले कैंसर से बचाव, शुगर को ठीक करने वाले पौधे, कोरोना काल में महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव को लेकर अध्ययन करेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार की रिसर्च एंड डेवलपमेंट योजना 2020-21 के अंतर्गत विश्वविद्यालय के 9 शिक्षकों के रिसर्च प्रोजेक्ट्स को अनुमति मिल गई है।
विश्वविद्यालय प्रदेश में तीसरे नंबर पर रहा है। प्रदेश के लखनऊ और प्रयागराज विश्वविद्यालयों को ही बरेली के विश्वविद्यालय से ज्यादा रिसर्च प्रोजेक्ट मिले हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय से संबंद्ध महाविद्यालयों के 12 शिक्षकों के प्रोजेक्ट को भी अनुदान मिला है, जिसमें बरेली कॉलेज के प्राचार्य व चीफ प्रॉक्टर समेत 5 शिक्षकों के प्रोजेक्ट शामिल हैं।
शासन ने बुधवार को 10 विश्वविद्यालयों के 56 शिक्षकों के रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए 15862700 रुपये की धनराशि स्वीकृत की है जिसमें एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिसर के प्रो. संजय गर्ग, प्लांट साइंस, प्रो. आलोक श्रीवास्तव, प्लांट साइंस, प्रो. संतोष अरोरा, एजुकेशन, प्रो. एस. एस. बेदी, सीएसआईटी, प्रो. जेएन मौर्या, प्लांट साइंस, डा. बृजेश कुमार, सीससआईटी, डा. अनिता त्यागी, ह्यूमैनिटी, डा. मदन लाल, मैथ्स, डा. तौसीफ़ सिद्दीकी, सीएसआईटी को 24 लाख 44 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई है।
इसी तरह से महाविद्यालयों के 84 शिक्षकों के लिए 22140000 रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई है जिसमें 29 लाख 96 हजार रुपये एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के 12 शिक्षकों को मिले हैं। इस धनराशि का उपयोग शिक्षक प्रोजेक्ट में ही इस्तेमाल कर सकेंगे। कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर शिक्षकों के प्रोजेक्ट को चुने जाने से विश्वविद्यालय का नाम होगा। विश्वविद्यालय के मीडिया सेल प्रभारी डा. अमित सिंह ने सभी शिक्षकों के रिसर्च प्रोजेक्ट के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी है।
विश्वविद्यालय के प्रो. आलोक श्रीवास्तव बैक्टीरिया मीडिएट बॉयोडिग्रेशन ऑफ़ हेवी मेटल पर रिसर्च कर रहे हैं। इसके तहत वह बालों में लगाने वाली डाई से होने वाले कैंसर से बचाव के लिए ऐसे बैक्टेरिया खोजेंगे, जो हेवी मेटल्स के कैंसर उत्पन्न करने वाले नाइट्रोफेनॉल को सरल तत्व में तोड़ने का कार्य करेंगे जिससे कैंसर रोग पर निदान पाने में मदद होगी।
प्रो. जेएन मौर्या स्टविया पौधे के एंटीऑक्सीडेंट टिव इफ़ेक्ट का अध्ययन पर प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट में डायबिटीज में उपयोग में आने वाले स्टीविया पौधे में ग्रोथ हार्मोन देकर एंटीऑक्सीडेटिव भार को कम करने पर कार्य करेंगे। इस प्रोजेक्ट से कृत्रिम शुगर जो पौधे से मिलता है और चीनी से 200 गुना अधिक मीठा होता है उसके उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इससे शुगर के मरीजों को काफी लाभ होगा। कोविड-19 के सामाजिक व आर्थिक पहलू का महिलाओं पर क्या असर पड़ा है। इस पर डा. अनीता त्यागी शोध कर रही हैं। वह शहर व देहात क्षेत्र में शोध करेंगी। डा. मदन लाल ए कंप्रेहेंसिव एनालिसिस ऑफ ब्लड बेस्ड कार्बन नैनो ट्यूब्स अंडर मैग्नेटो हाइड्रो डायनामिक्स पर शोध कर रहे हैं।
मखाने की खेती की जाएगी
प्रो. संजय कुमार गर्ग के रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत बरेली परिक्षेत्र में मखाने की खेती को बढ़ावा देना है, क्योंकि इस क्षेत्र में काफी तालाब हैं और यहां की जलवायु मखाने की खेती के लिए उपयुक्त है। मखाना हमारे देश में मुख्य ड्राई फूड है जिसमें प्रोटीन तथा फाइबर प्रचुर मात्रा में है। इसमें कैल्शियम फास्फोरस मैग्नीशियम आदि मिनरल प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। इसकी खेती बिहार के कुछ इलाकों में होती है। बरेली में खेती होने से यहां के किसानों की आय बढ़ेगी।
पौधों और पशुओं की बीमारी का एप से लगाएंगे पता
शासन ने जो रिसर्च चुनी हैं, उनके तहत पौधों और पशुओं की बीमारी का मोबाइल एप से पता लगाया जा सकेगा। विश्वविद्यालय के प्रोफेसर इन पर भी रिसर्च करेंगे। यांत्रिक इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. तौसीफ उद्दीन सिद्दीकी का रिसर्च प्रोजेक्ट टीआई6ए 14 वी एयरोस्पेस ग्रेड मिश्र धातु के पर्यावरण के अनुकूल मशीनिंग के लिये वनस्पति तेल आधारित नैनो लुब्रिकेंट्स का उपयोग करना है। इसके प्रोजेक्ट के तहत उन्होंने ग्रीन हाउस उत्सर्जन के कारण ग्लोबल वार्मिंग के पर्यावरणीय पूर्वानुमानों से टिकाऊ और हरित विनिर्माण पर्यावरण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है। मशीनिंग एक नियंत्रित सामग्री हटाने की प्रक्रिया है और विभिन्न प्रकार के औद्योगिक क्षेत्रों जैसे ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस और रक्षा में इसके आवेदन को ढूंढती है। सूक्ष्मजीवों के जैव रासायनिक पदार्थों के संपर्क में आने से सांस की जलन, अस्थमा, निमोनिया, जिल्द की सूजन और यहां तक कि कैंसर भी हो सकता है। टीआई6ए 14 वी मिश्र धातु पर मिलिंग ऑपरेशन के दौरान वनस्पति तेल आधारित काटने तरल पदार्थ द्वारा नैनो-स्नेहन की प्रभावशीलता की जांच की जाएगी।
फोटो खींचकर पौधों की जान सकेंगे बीमारी
डा. बृजेश कुमार के प्रोजेक्ट प्लांट डिजीज आइडेंटिफिकेशन यूसिंग कंप्यूटर विज़न टेक्निक्स के अंतर्गत कंप्यूटर आधारित ऐसी प्रणाली का विकास किया जायेगा जिसके द्वारा डिजिटल इमेज के आधार पर पौधों की स्वास्थ्य जांच की जा सकेगी| इसके द्वारा पत्तियों के फोटो का उपयोग कर पौधों में लगी बीमारी को पहचाना जा सकेगा| इस प्रणाली का लाभ उन लोगों को मिलेगा जो विशेषज्ञ नहीं है। इस प्रणाली के अंतर्गत मोबाइल आधारित सॉफ्टवेयर भी डेवेलप किया जा सकेगा जिसे मोबाइल में इंस्टॉल कर किसान या बागवानी करने वाले लोग पौधों और पेड़ों की पत्तियों की फोटो लेकर तुरंत बीमारी की जांच कर उचित कार्यवाही कर सकते हैं।
