मुरादाबाद: 550 एड्स संक्रमितों की जिंदगी लाल घेरे में
मुरादाबाद। एड्स जैसी घातक बीमारी का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। विभाग ने वर्ष 2018 से लेकर अब तक 3000 से अधिक लोगों के इस संक्रमण के लिए रक्त का परीक्षण किया, जिसमें से 550 लोग एचआईवी धनात्मक पाए गए हैं। जिसमें वर्ष 2020-21 में 218 मरीज शामिल हैं। जिनमें 126 पुरूष और 92 …
मुरादाबाद। एड्स जैसी घातक बीमारी का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। विभाग ने वर्ष 2018 से लेकर अब तक 3000 से अधिक लोगों के इस संक्रमण के लिए रक्त का परीक्षण किया, जिसमें से 550 लोग एचआईवी धनात्मक पाए गए हैं। जिसमें वर्ष 2020-21 में 218 मरीज शामिल हैं। जिनमें 126 पुरूष और 92 महिलाएं शामिल हैं। इनमें 203 संक्रमितों को एआरटी से लिंक किया गया है। साल दर साल बढ़ रहा यह आंकड़ा चिंता का विषय बनता जा रहा है।
इधर, लोगों में इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने वाला तंत्र और समाजसेवी संस्थाएं प्रचार-प्रसार में रूचि नहीं दिखा रही हैं। जिला अस्पताल में साल 2004 में एचआईवी जांच शुरू की गई थी। तब से लेकर हजारों से अधिक लोगों की एचआईवी जांच की गई है, जिसमें करीब 550 लोग एचआईवी संक्रमित पाए गए हैं। जिला अस्पताल के रिकार्ड दावा कर रहे हैं कि 2020-21 में विभाग ने 218 मरीज, 2019 में 200 मरीज और 2018 में 132 लोग एचआईवी संक्रमित मिले हैं।
विभाग के रिकार्ड के अनुसार जिला अस्पताल में साल 2006 तक एड्स मरीजों की सिर्फ जांच होती थी। इलाज के लिए दवाएं नहीं मिलती थी। इस दौरान कई एचआईवी पॉजिटिव लोगों की मौत भी हो गई थी। वहीं साल 2007 में एचआईवी से ग्रस्त मरीजों को इलाज के लिए निशुल्क दवा मिलनी शुरू हुई। वर्तमान में यह मरीज अस्पताल से दवा ले रहे हैं।
जिला अस्पताल सीएमएस कल्पना सिंह का कहना है कि जिलेभर में इस वर्ष करीब 218 एचआईवी पॉजेटिव सामने आए हैं। जिनका इलाज चल रहा है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, क्योंकि इसके लिए सिर्फ जानकारी ही बचाव है।
ऐसे फैलता है एड्स
असुरक्षित यौन संबंध से
एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने से
एचआईवी पीड़ित मां से उसके बच्चे को
एचआईवी संक्रमित सुई या सिरिंज प्रयोग से।
भेदभाव नहीं करें
सीएमएचओ जेआर त्रिवेदिया ने बताया कि एचआईवी पीड़ित को लेकर अभी भी लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। अज्ञानतावश लोग इसे छूत की बीमारी समझते हुए इसका पता चलते ही पीड़ित से भेदभाव करने लगते हैं। उनके साथ उठना बैठना तक त्याग देते हैं, जबकि वास्तविकता कुछ और ही है। एचआईवी पीड़ित भी लंबे समय तक सामान्य जीवन जी सकता है। ऐसे व्यक्ति से भेदभाव करने की बजाय उसे अपनाएं। उनके साथ अच्छा व्यवहार करें। सामाजिक भेदभाव न बरतें।
