व्यर्थ न जाए बलिदान

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

छत्तीसगढ़ एक बार फिर से बड़ी नक्सली हिंसा का शिकार हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ में यह सबसे बड़ा नक्सली हमला माना जा रहा है। हमला यही बता रहा है कि नक्सलियों का दुस्साहस फिर से सिर उठा रहा है। इस घटना ने पूरे देश को शोकाकुल कर दिया है। पिछले दिनों 23 …

छत्तीसगढ़ एक बार फिर से बड़ी नक्सली हिंसा का शिकार हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ में यह सबसे बड़ा नक्सली हमला माना जा रहा है। हमला यही बता रहा है कि नक्सलियों का दुस्साहस फिर से सिर उठा रहा है। इस घटना ने पूरे देश को शोकाकुल कर दिया है। पिछले दिनों 23 मार्च को नक्सलियों ने नारायणपुर जिले में जवानों को ले जा रही बस में विस्फोट कर दिया था, जिसमें पांच जवान शहीद हो गए थे। जबकि इससे पहले मार्च के मध्य में नक्सलियों ने सरकार से बातचीत करने की पेशकश की थी।

उन्होंने बातचीत के लिए जो तीन शर्तें रखी थीं, उनमें सशस्त्र बलों को हटाने, माओवादी संगठनों पर लगे प्रतिबंध हटाने और जेल में बंद उनके नेताओं की बिना शर्त रिहाई शामिल थीं। नक्सलियों ने शांति वार्ता की सशर्त पहल के चंद दिनों बाद ही हिंसा और रक्तपात करके संदेश दिया है कि उनके प्रस्ताव गुमराह करने वाले थे।

दरअसल नक्सली इन दिनों टेक्टिकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन (टीसीओसी) चला रहे हैं। टीसीओसी नक्सलियों की सैन्य रणनीति का हिस्सा है। टीसीओसी के तहत साल के कुछ महीने नक्सली संगठित होकर सुरक्षाबलों पर वार करते हैं। आमतौर पर फरवरी से जून के बीच टीसीओसी चलाया जाता है। इस दौरान जंगल में पतझड़ का मौसम होता है, जिससे दूर तक देखना आसान होता है। साथ ही नदी-नाले सूखने से एक जगह से दूसरी जगह जाना भी आसान होता है।

बीजापुर की ताजा घटना के बाद राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बात की और जवानों की मौत पर गहरा दुख जताया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी शहीद जवानों के परिवारों से संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी शहादत बेकार नहीं जाएगी।

ऐसे कठिन समय में पूरे देश को एकजुट होकर नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में सुरक्षाबलों के साथ खड़ा होना पड़ेगा। ऐसे घृणित हमले के विरुद्ध किसी भी राजनीतिक दल को राजनीतिक रोटियां सेंकने से बचना चाहिए ताकि शहीदों का बलिदान व्यर्थ न जाए। जवानों की शहादत बेकार नहीं जाने का अर्थ है कि जिस कारण से उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी, उस कारण को दूर किया जाएगा।

यहां सरकारों को जवाब देना चाहिए कि वे आखिर ऐसा क्या करने वाले हैं, जिससे नक्सल समस्या का हल निकलेगा। सरकारों को अब नक्सलियों के खिलाफ ज्यादा घातक आपरेशन की रणनीति पर काम करने की जरुरत है। नक्सलियो को भी आतंकवादी मानकर अभियान चलाया जाना चाहिए। क्योंकि वे देश में शाति व स्थायित्व के लिए बड़ा खतरा हैं।