न्यायिक सेवा की वकालत

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Edited By Amrit Vichar
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केंद्र सरकार निचली न्यायपालिका के लिए अलग कैडर वाली एक नई सेवा अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (एआईजेएस) के विचार को लेकर गंभीर है, जिसका उल्लेख कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने किया है। राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के अनुसार देश के विभिन्न जिला व निचली अदालतों में 3.81 करोड़ वाद लंबित हैं, जिसमें एक लाख से …

केंद्र सरकार निचली न्यायपालिका के लिए अलग कैडर वाली एक नई सेवा अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (एआईजेएस) के विचार को लेकर गंभीर है, जिसका उल्लेख कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने किया है। राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के अनुसार देश के विभिन्न जिला व निचली अदालतों में 3.81 करोड़ वाद लंबित हैं, जिसमें एक लाख से अधिक मामले तीस साल से लंबित हैं। सरकार ने हाल ही में उच्चतम न्यायालय को निचली न्यायपालिका में न्यायाधीशों की भर्ती के लिए सुझाव दिए थे।

वर्तमान में न्यायिक अधिकारियों की भर्ती के लिए विभिन्न उच्च न्यायालय और राज्य सेवा आयोग परीक्षाओं का आयोजन करते हैं। दरअसल केंद्र सरकार की कोशिश है कि आईएएस और आईपीएस जैसी सेवाओं की तरह अखिल भारतीय न्यायिक सेवा आरंभ की जाए। सरकार की कोशिश है कि सभी हितधारकों को साथ लेकर आगे बढ़ा जाए।

संविधान के अनुच्छेद 312(1) में किसी अखिल भारतीय सेवा को स्थापित करने का प्रावधान है, जिसके जरिए एआईजेएस के विचार को अंतिम रूप दिया जा सकता है, जिसके अंतर्गत राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव का पारित होना आवश्यक है, जिसके बाद संसद को एआईजेएस को मूर्तरूप देने वाला कानून बनाना होगा।

विगत में सरकार के ऐसे प्रयासों का कई उच्च न्यायालयों व राज्यों ने विरोध भी किया था। आंध्रप्रदेश, बंबई, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पटना और पंजाब तथा हरियाणा उच्च न्यायालय अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (एआईजेएस) के विचार के पक्ष में नहीं हैं। केवल सिक्किम और त्रिपुरा उच्च न्यायालयों ने ही निचली अदालतों के लिए एक अखिल भारतीय सेवा की व्यवस्था किए जाने के लिए सचिवों की समिति द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव के पक्ष में राय जाहिर की है। उनकी सोच थी कि यह विचार संघवाद के विरुद्ध जाएगा। इसके बावजूद केंद्र सरकार मुद्दे पर सहमति बनाने हेतु प्रयासरत रही है।

यही वजह है कि कानून मंत्री ने उच्च न्यायालयों समेत सभी हितधारकों से एआईजेएस के मुद्दे पर परंपरागत विरोध का परित्याग करने का आग्रह किया ताकि भविष्य में इस विचार को अमलीजामा पहनाने में मदद मिल सके। एआईजेएस न्याय प्रदान करने की समग्र प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण होगी।

यह सेवा अखिल भारतीय योग्यता चयन प्रणाली के जरिये योग्य नई विधिक प्रतिभाओं के चयन के साथ साथ सामाजिक समावेश के मुद्दे का समाधान करेगी। इससे समाज के वंचित एवं हाशिये पर गये वर्गों को समुचित प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। साथ ही इससे सामाजिक समावेश के मुद्दे का हल भी निकलेगा।