मुरादाबाद: हादसे में घायल हुआ वृद्ध, 13 साल बाद मिला परिवार
मुरादाबाद,अमृत विचार। सड़क हादसे में घायल हुए वृद्ध को आखिरकार 13 साल बाद उसके परिजन मिल गए। उन्हें परिजनों से मिलवाने में मूंढापांडे थाने में तैनात दरोगा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वृद्ध द्वारा दी गई आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर उन्होंने परिजनों को तलाश किया। काफी मशक्कत के बाद उनका संपर्क पंजाब में रहने वाले …
मुरादाबाद,अमृत विचार। सड़क हादसे में घायल हुए वृद्ध को आखिरकार 13 साल बाद उसके परिजन मिल गए। उन्हें परिजनों से मिलवाने में मूंढापांडे थाने में तैनात दरोगा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वृद्ध द्वारा दी गई आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर उन्होंने परिजनों को तलाश किया। काफी मशक्कत के बाद उनका संपर्क पंजाब में रहने वाले उनके परिजनों से हो गया। फोटो भेजकर पहचान पुख्ता हुई तो आनन-फानन में परिजन भी यहां आ गए। 13 साल बाद वृद्ध को देख उन सबकी आंखे खुशी से नम हो गई। पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए लिखा-पढ़ी के बाद वे वृद्ध को अपने साथ ले गए।
घटना शुक्रवार को मूंढापांडे थाना क्षेत्र के दलपतपुर में हुई। बताते हैं कि सड़क हादसे में एक वृद्ध घायल हो गया था। राहगीरों से सूचना मिलने पर पुलिस ने उसे एंबुलेंस से मुरादाबाद स्थित जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया था। बाद में दलपतपुर चौकी में तैनात दरोगा मनोज कुमार और एक सिपाही ओमवीर सिंह घायल के बयान दर्ज करने जिला अस्पताल पहुंचे।
बयानों के दौरान वृद्ध बार-बार अहमदनगर और पंजाब बोल रहा था। इसके अलावा वह कोई ठोस जानकारी नहीं दे पा रहा था। इसके बाद दरोगा मनोज कुमार ने जांच पड़ताल शुरू की। काफी मशक्कत के बाद मालूम हुआ कि वृद्ध पंजाब के जिला संगरूर के थाना अहमदनगर के ग्राम रोलीवाला का रहने वाला है। इसके बाद उन्होंने अहमदनगर थाना पुलिस से संपर्क किया। साथ ही वृद्ध का फोटो भी भेजा। उसके आधार पर पुलिस ने गांव जाकर उनके परिजनों को तलाश कर लिया।
ग्राम प्रधान से बात होने के बाद मालूम हुआ कि उनका नाम मोनी सिंह है। प्रधान ने उनके बेटे बलजीत सिंह से भी बात कराई। पहचान होने के बाद शनिवार को प्रधान और वृद्ध का पुत्र बलजीत सिंह यहां आ गए। जिला अस्पताल में मोनी सिंह को देख पुत्र की आंखें खुशी से छलक उठीं। उन्होंने बताया कि 13 साल पहले उनके पिता अचानक गायब हो गए थे। काफी खोजबीन के बाद भी जानकारी नहीं हो सकी। थाने में गुमशुदगी भी दर्ज करा दी थी। बेलंबा वक्त होने के कारण वे लोग नाउम्मीद हो चुके थे। लेकिन, दरोगा मनोज कुमार और सिपाही ओमवीर के प्रयासों के कारण एक बार फिर वह उनके पिता उन्हें मिल गए।
