कोरोना के बीच चुनाव

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Edited By Amrit Vichar
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मोहब्बत और जंग में सब कुछ जायज़ है, लेकिन नई कहावत यह है कि जो मोहब्बत और जंग में भी जायज़ नहीं है वह सियासत में जायज़ है, जहां आम आदमी पर लागू होने वाले सारे नियम-कानून तोड़े जा सकते हैं। देश व प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार बेकाबू होती जा रही है। 15 …

मोहब्बत और जंग में सब कुछ जायज़ है, लेकिन नई कहावत यह है कि जो मोहब्बत और जंग में भी जायज़ नहीं है वह सियासत में जायज़ है, जहां आम आदमी पर लागू होने वाले सारे नियम-कानून तोड़े जा सकते हैं। देश व प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार बेकाबू होती जा रही है। 15 अप्रैल से उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव 29 अप्रैल तक चलेंगे।

इस चुनाव को लेकर उच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका में कहा गया था कि बढ़ते संक्रमण के बीच चुनाव कराना जनहित के खिलाफ है। लेकिन उच्च न्यायालय ने इस उम्मीद के साथ हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था कि चुनाव में जरुरी सावधानियां बरती जाएंगी। इसके बाद प्रदेश में कोरोना की नई गाइडलान जारी की गई।

विडंबना कि आम आदमी की शादी में तो खुले मैदान में भी सिर्फ़ 100 लोगों के शामिल होने की मंजूरी रहेगी। स्कूल बंद हैं। परंतु नामांकन और प्रचार में जुलूस निकाले जा रहे हैं। प्रचार के दौरान जुट रही भीड़ में आधे लोग बिना मास्क के होते हैं और दो गज दूरी तो छोड़िए वे एक-दूसरे से दो इंच दूर खड़े होने को तैयार नहीं हैं।

जीत सुनिश्चित करने के लिए गांवों से बाहर गए श्रमिकों को वोट डालने के लिए बुलाया जा रहा है। क्या वे संक्रमण के संभावित वाहक नहीं हैं। उनकी निगरानी की कोई व्यवस्था नजर नहीं आ रही। हालात ये हैं कि भाजपा समर्थित प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में जुटे केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार संक्रमित हो गए। मीरगंज क्षेत्र के विधायक डॉ डीसी वर्मा भी पॉजिटिव हो गए। मुरादाबाद के जिलाधिकारी भी संक्रमण की चपेट में हैं।

महाराजगंज में कृषि उपनिदेशक वी.कुमार की कोरोना से मौत हो गई। वे पंचायत चुनाव में आरओ के पद पर तैनात थे। तंत्र की लाचारी व लापरवाही लगातार सामने आ रही है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पोस्टमार्टम हाउस में कोरोना संक्रमित कई शव पड़े हैं। शव पाने के लिए स्वजन इंतजार कर रहे हैं। उधर, श्मशान घाट पर शव जलाने को लकड़ियों की कमी है। ऐसे मामले महाराष्ट्र में भी सामने आए हैं। प्रदेश में कई जगहों पर आवश्यक दवाइयों से लेकर ऑक्सीजन तक की किल्लत है। डॉक्टर-नर्स संक्रमित होते जा रहे हैं।

चिकित्सा व्यवस्था ध्वस्त है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यूपी के मंत्री ब्रजेश पाठक ने पत्र लिखकर कहा है कि पद्मभूषण योगेश प्रवीण की इलाज न मिलने से मौत हो जाती है, मंत्री के निवेदन पर भी एंबुलेंस नहीं मिलती है तो आम आदमी का क्या होता होगा। प्रत्याशियों व समर्थकों की ओर से कोविड प्रोटोकाल की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और पंचायत चुनाव कराने जरुरी हैं तो भी कोरोना नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाना चाहिए।