बरेली: भक्तों ने की कालरात्रि की अराधना, कल मनाई जाएगी अष्टमी

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बरेली,अमृत विचार। सोमवार को भक्तों ने मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की उपासना की। मां कालरात्रि को काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, मिृत्यू, रुद्रानी, चामुंडा, चंडी, रौद्री और धुमोरना देवी के नाम से जाना जाता है। ये सदैव शुभ फल देने वाली माता के रूप में पूजी जाती हैं। वहीं मंगलवार को अष्टमी मनाई …

बरेली,अमृत विचार। सोमवार को भक्तों ने मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की उपासना की। मां कालरात्रि को काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, मिृत्यू, रुद्रानी, चामुंडा, चंडी, रौद्री और धुमोरना देवी के नाम से जाना जाता है। ये सदैव शुभ फल देने वाली माता के रूप में पूजी जाती हैं। वहीं मंगलवार को अष्टमी मनाई जाएगी। अष्टमी व नवमी के दिन भक्त कन्या लांगुरा का पूजन करते हैं।

सोमवार को मां कालाबाड़ी, चौरासी घंटा मंदिर, साहूकारा स्थित नवदुर्गा मंदिर समेत सभी मंदिरों में भक्तों का कम ही आना रहा। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को कोरोना नियमों के तहत ही प्रवेश दिया गया। भक्तों ने मां दुर्गा के सातवें स्वरूप कालरात्रि का पूजन किया। कलश स्थल पर दीप जलाकर दुर्गा सप्तशती का पाठ किया और फल, पुष्प व मिष्ठान अर्पित किया। व्रती महिलाओं ने शारीरिक दूरी मानक का पालन करते हुए घर में भजन-कीर्तन के जरिए उनसे शारीरिक, मानसिक, आर्थिक व भौतिक कष्टों से मुक्ति पाने की कामना की।

महागौरी की भक्त करेंगे उपासना
चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा की आठवीं शक्ति माता महागौरी की उपासना की जाएगी। इनका रंग पूर्णतः गोरा होने के कारण इन्हें महागौरी कहा जाता है। इस दिन कन्या पूजन करने का भी विधान है। कोरोना महामारी की वजह से लोग घर पर मौजूद ही कन्याओं को भोजन कराएं। शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि महागौरी को शिवा भी कहा जाता है। इनके हाथ में दुर्गा शक्ति का प्रतीक त्रिशूल है तो दूसरे हाथ में भगवान शिव का प्रतीक डमरू है। अपने सांसारिक रूप में महागौरी उज्ज्वल, कोमल, श्वेत वर्णी तथा श्वेत वस्त्रधारी और चतुर्भुजा हैं। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में डमरू है तो तीसरा हाथ वरमुद्रा में हैं और चौथा हाथ एक गृहस्थ महिला की शक्ति को दर्शाता हुआ है। महागौरी को गायन और संगीत बहुत पसंद है। ये सफेद वृषभ यानी बैल पर सवार रहती हैं। इनके समस्त आभूषण आदि भी श्वेत हैं। महागौरी की उपासना से पूर्वसंचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं।

अष्टमी तिथि शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- 20 अप्रैल सुबह 4 बजकर 11 मिनट से सुबह 4 बजकर 55 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- 20 अप्रैल सुबह 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- 20 अप्रैल शाम 6 बजकर 22 मिनट से शाम बजकर 6 बजकर 46 मिनट तक

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