फिर दिखाई अकड़
भारत की ओर से लगातार कोशिश की जा रही है कि चीन के साथ जारी गतिरोध को कम किया जाया जा सके। चीन है कि लद्दाख व अरुणाचल प्रदेश में अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। चीन ने एक बार फिर अड़ियल रुख अपनाते हुए पूर्वी लद्दाख में हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और देपसांग …
भारत की ओर से लगातार कोशिश की जा रही है कि चीन के साथ जारी गतिरोध को कम किया जाया जा सके। चीन है कि लद्दाख व अरुणाचल प्रदेश में अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। चीन ने एक बार फिर अड़ियल रुख अपनाते हुए पूर्वी लद्दाख में हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और देपसांग के संघर्ष वाले क्षेत्रों में अपने सैनिकों को पीछे हटाने से इनकार कर दिया है। उसने यह भी कहा कि भारत को जो मिला है, उसमें खुश रहे (पैंगोंग इलाके से पीछे हटना)।
इससे पहले फरवरी महीने में भारत और चीन की सेनाएं पैंगोंग झील और कैलाश रेंज से पीछे हट गई थीं और अन्य विवादित स्थलों को लेकर बातचीत करने पर सहमति बनी थी। सूत्र ने कहा कि इस इलाके में आने जाने के लिए रोड की जरूरत नहीं है। वे बहुत जल्द ही आ जाते हैं और इस समय में वे भारतीय क्षेत्र में अंदर तक घुसे हुए हैं।
यह मुद्दा वर्ष 2013 से बना हुआ है। इलाके में पिछले हफ्ते दोनों देशों के बीच 11 वें दौर की सैन्य वार्ता चली। दरअसल चीन चाहता है कि भारतीय सेना अब एलएसी के पास पेट्रोलिंग पॉइंट 15 और 17 ए पर उसकी नई स्थिति को स्वीकार करे और वह इन इलाकों में अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति पर जाने में भी आनाकानी कर रहा है। दरअसल ये इलाके भारत और चीन, दोनों के लिए रणनीतिक तौर पर बेहद अहम है। चीनी सेना गोगरा, हॉट स्प्रिंग और कोंगका ला क्षेत्र से इलाके में तैनात अपने सैनिकों के लिए भारी मात्रा में रसद पहुंचा पाती है।
दसवें दौर की सैन्य वार्ता 20 फरवरी को हुई थी। इसी तरह अरुणाचल में भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर पुराना विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा मानता है, जबकि भारत इसे नकारता है। पिछले दिनों मीडिया में खबरें आई थी कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के विवादित क्षेत्र में एक नया गांव बसा लिया है। सभी जानते हैं कि धोखेबाज चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है और वह अपनी विस्तारवादी नीति पर चल रहा है।
उधर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सरकार देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रही है और चीन के साथ उसकी बातचीत ‘निरर्थक’ रही है। साफ है कि चीन को जुबानी चेतावनी देने से समस्या सुलझेगी नहीं। इसके लिए सोची-समझी रणनीति बनाने की जरूरत है। सीमाओं को लेकर भारत को और सतर्क रहना चाहिए। लद्दाख या अरुणाचल प्रदेश में जो हुआ, केंद्र सरकार उसे अकेली घटनाओं की तरह न देखे। यह चीन की अतिक्रमणकारी योजना का हिस्सा है और इसका जवाब देने की जरूरत है।
