असली जिम्मेदार कौन
लोगों के जीवन को लीलने वाली कोरोना महामारी से दुनिया परेशान है। देश में हजारों लोग इस गंभीर बीमारी के चलते असमय काल का ग्रास बन रहे हैं। लोगों को वैक्सीन आने व आम जनमानस को लगने की शुरूआत होने का इंतजार था। कोरोना की वैक्सीन आने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब …
लोगों के जीवन को लीलने वाली कोरोना महामारी से दुनिया परेशान है। देश में हजारों लोग इस गंभीर बीमारी के चलते असमय काल का ग्रास बन रहे हैं। लोगों को वैक्सीन आने व आम जनमानस को लगने की शुरूआत होने का इंतजार था। कोरोना की वैक्सीन आने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब जल्द ही भारत से कोरोना का सफाया हो जाएगा और हालात फिर से पहले की तरह सामान्य हो जाएंगे।
लेकिन कुछ लोगों की लापरवाही के चलते बड़े पैमाने पर हो रहे वैक्सीनेशन के बाद भी एकबार फिर से देश में कोरोना महामारी अपने पूर्ण चरम पर आ गई है।देश में कोरोना से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या अब तीन लाख प्रतिदिन को पार कर गई है। वर्तमान हालात को देखते हुए यह भी कहा जा सकता है कि एक देश के तौर पर हम पिछले एक साल के अनुभव से शायद बहुत अधिक नहीं सीख पाए। यदि सीखा होता तो आज इस तरह की विषम परिस्थिति पैदा नहीं हुई होती।
कोरोना काल में विधानसभा चुनावों को लेकर मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार को निर्वाचन आयोग की तीखी आलोचना करते हुए देश में कोविड-19 की दूसरी लहर के कथित प्रकोप के लिए चुनाव आयोग को सबसे गैर जिम्मेदार संस्था करार दिया। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के खिलाफ हत्या के आरोपों में भी मामला दर्ज किया जा सकता है। चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को रैलियां और सभाएं करने की अनुमति देकर कोविड-19 की दूसरी लहर के प्रकोप का रास्ता साफ कर दिया था।
यह सही है कि जब चुनाव आयोग ने तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी की थी, तब इतनी गंभीर स्थिति नहीं थी लेकिन जैसे-जैसे चुनाव प्रक्रिया बढ़ी, हालात गंभीर होते गए और एहतियात के लिए चुनाव आयोग के दिशा निर्देश कागजी ही साबित हुए। राजनीतिक दल कोरोना प्रोटोकाल की धज्जियां उड़ाते हुए रैलियां करते रहे, जबकि चुनाव आयोग चुप्पी साधे बैठा रहा।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मद्रास हाई कोर्ट की इस कड़ी और बड़ी टिप्पणी का स्वागत किया है। यह बात और है कि भीड़ भरी रैलियां करने के मामले में वे भी पीछे नहीं रहीं हैं। रैलियों में जानबूझकर कोरोना दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए राजनीतिक दलों को नहीं रोकने के मामले में चुनाव आयोग के विरुद्ध मद्रास उच्च न्यायालय यह टिप्पणी सख्त और आंख खोलने वाली है। इस संबंध में सरकार ने भी गंभीरता नहीं दिखाई।
