भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान ने आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने पर जताई सहमति
नई दिल्ली। भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान में समावेशी, समग्र और सुदृढ़ विकास के लिए आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्री कजियामा हिरोशी ने मंत्रिस्तरीय वीडियो कांफ्रेंस की। उन्होंने स्वीकार …
नई दिल्ली। भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान में समावेशी, समग्र और सुदृढ़ विकास के लिए आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्री कजियामा हिरोशी ने मंत्रिस्तरीय वीडियो कांफ्रेंस की।
उन्होंने स्वीकार किया कि कोविड -19 महामारी जन जीवन, आजीविका और अर्थव्यवस्थाओं के पर अभूतपूर्व असर डाल रही है तथा महामारी ने वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।
मंत्रियों ने कहा कि यह कुछ आपूर्ति श्रृंखलाओं को विभिन्न कारणों से छोड़ दिया गया है और इन पर ध्यान देने की जरूरत है। पिछले साल सितंबर से ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान के बीच उच्च स्तरीय परामर्श के आधार पर तीनों मंत्रियों ने आपूर्ति श्रृंखला अवरोधों से बचने के लिए जोखिम प्रबंधन और निरंतरता के महत्व पर जोर दिया और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
बैठक के दौरान तीनों पक्षों ने डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग और व्यापार तथा निवेश विविधीकरण पर जोर दिया। बैठक के तीनों मंत्रियों ने आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ता पहल (एससीआरआ़ई) का शुभारंभ किया। मंत्रियों ने अधिकारियों को एससीआरआई की प्रारंभिक परियोजनाओं के रूप में लागू करने के निर्देश दिए और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती पर सर्वोत्तम तरीकों को साझा करने के लिए कहा। तीनों देशों ने साल में कम से कम एक बार एससीआरआई के कार्यान्वयन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करने के साथ-साथ पहल को विकसित करने के बारे में परामर्श करने का निर्णय लिया।
उन्होंने पहल को लागू करने के लिए अधिकारियों को लगातार बैठक करने को भी कहा। एससीआरआई का लक्ष्य इस क्षेत्र में अंततः मजबूत, स्थायी, संतुलित और समावेशी विकास की दृष्टि से आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। पहल को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए मंत्रियों ने चार महीने में एक बार त्रिपक्षीय मंत्री बैठक बुलाने की संभावना तलाशने का निर्देश भी दिये।
