बाजार बंद और बेबसी: सुबह से दोपहर तक केवल 20 रुपये की कमाई, सवाल ‘शाम’ का है इसलिए उम्मीद बाकी है…
हल्द्वानी, अमृत विचार। कोरोना महामारी से बचने के लिए लोग न जाने क्या – क्या जतन करने में लगे हैं। जबकि एक तबका ऐसा भी है जिसे महामारी का खौफ नहीं है। साथ ही उनके पास कोई नौकरी का सहारा भी नहीं है, वो बस अपनी आजीविका के सहारे ही जिंदा रहता है। ऐसे लाचार …
हल्द्वानी, अमृत विचार। कोरोना महामारी से बचने के लिए लोग न जाने क्या – क्या जतन करने में लगे हैं। जबकि एक तबका ऐसा भी है जिसे महामारी का खौफ नहीं है। साथ ही उनके पास कोई नौकरी का सहारा भी नहीं है, वो बस अपनी आजीविका के सहारे ही जिंदा रहता है। ऐसे लाचार लोग जो बाजार बंदी की वजह से दो जून की रोटी तक नहीं जुटा पा रहे हैं। इस वर्ग के सामने बीमारी से मर जाने की चुनौती से ज्यादा पेट की भूख और परिवार की परवरिश न होने से जान जाने का डर ज्यादा है। पहले ही बामुश्किल गुजारा हो पाता था, लेकिन अब बाजार बंद होने के कारण लोगों की भीड़ न जुटने से इनके लिए हालात और बदतर हो रहे हैं। ऐसे में ये जाएं तो कहा जाएं…
नैनीताल रोड पर फुटपाथ पर जूता-चप्पल मरम्मत का काम करने वाले रामप्रसाद ने बताया कि वह सुबह 8 बजे से ही काम पर पहुंच जाते है। आम दिनों में 200 -250 रुपये का काम हो जाता है, लेकिन बुधवार को शाम 3 बजे तक सिर्फ 20 रुपये का ही काम हुआ है। पूछने पर बताया कि बाजार बंद के कारण लोग नही पहुंच रहे हैं। उनके ऊपर दो बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी भी है, न किसी प्रकार का बैंक बैलेंस है, तो गुजारा करने के लिए रोज यहां आकर दिन भर मेहनत कर लोगों के जूते, चप्पलों की मरम्मत करते हैं। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह कहते हैं कि मेरे सामने सवाल ‘शाम’ का है। खुद तो भूख बर्दाश्त कर लेंगे, लेकिन शाम को बच्चों के लिए राशन और दूध कैसे ले जाउंगा। फिर कुछ ही देर में विश्वास भरे स्वर में कहा कि आज का दिन तो कट जाएगा, लेकिन कल जरूर ग्राहक पहुंचेंगे और अच्छी कमाई हो जाएगी। भगवान पर पूरा भरोसा है।
