बरेली: अपनों को बचाने के लिए खुद की जिंदगी दांव पर

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। अपनों की जिंदगी बचाने के लिए युवाओं को जान हथेली पर रखकर ऑक्सीजन सिलेंडर भरवाना पड़ रहा है। कई दिनों से मालियों की पुलिया के पास गैस एजेंसी पर इस कदर भीड़ जुट रही है कि गुरुवार को तहसीलदार सदर आशुतोष गुप्ता को भी मौके पर पहुंचना पड़ा जहां लोग अपनों को …

बरेली, अमृत विचार। अपनों की जिंदगी बचाने के लिए युवाओं को जान हथेली पर रखकर ऑक्सीजन सिलेंडर भरवाना पड़ रहा है। कई दिनों से मालियों की पुलिया के पास गैस एजेंसी पर इस कदर भीड़ जुट रही है कि गुरुवार को तहसीलदार सदर आशुतोष गुप्ता को भी मौके पर पहुंचना पड़ा जहां लोग अपनों को संक्रमण से मुक्ति दिलाने के लिए सिलेंडर भरवा रहे हैं।

वहीं संक्रमण से बचने के लिए खुद कोविड नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। तड़के लोग ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर पहुंच जाते हैं। कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी का सिलसिला बढ़ रहा है। इससे होम आइसोलेशन वाले मरीजों को दिक्कतें पैदा होने लगी है। उन्हें भरपूर ऑक्सीजन देने के लिए लोग सिलेंडर लेकर भटक रहे हैं। क्योंकि कोरोना से बेहिसाब मौतें हो रही हैं। होम आइसोलेशन वाले मरीज और उनके परिजन भी डरे हुए हैं। इस संक्रमण काल में ऑक्सीजन सिलेंडर विक्रेता और रिफिलिंग सेंटर वालों का भी अलग रवैया नजर आ रहा है।

पहले आओ-पहले पाओ से मिल रहे ऑक्सीजन सिलेंडर
ऑक्सीजन सिलेंडर रिफिल सेंटर के संचालकों ने पहले आओ पहले पाओ की व्यवस्था शुरू कर दी है। सेंटर पर लोगों को टोकन भी दिया जा रहा है। कई बार ऐसा भी हो रहा है कि पिछले दिन के टोकन धारकों को अगले दिन प्लांट से भरे ऑक्सीजन सिलेंडर आने पर ऑक्सीजन की रिफ्लिंग दी जाती है।

शहर में एक या दो जगह ही ऑक्सीजन की रिफ्लिंग या सिलेंडर देने की सुविधा लोगों को मुहैया हो रही है। वहीं बहुत से तीमारदार ऐसे भी होते हैं जो सुबह से शाम तक जीवनदायनी गैस का इंतजार करते हैं। शाम को सिलेंडर न मिलने की वजह से मायूस होकर वापस अपने मरीजों के पास लौट जाते हैं।

नेताओं की सिफारिश लेकर पहुंचे, झगड़ा होने से बचा
गुरुवार को गैस रिफलिंग एजेंसी पर कुछ लोग ऐसे भी देखने को मिले, जो किसी बड़े नेता की सिफारिश लेकर सिलेंडर रिफिल के लिए पहुंचे। इनकी वजह सुबह से टोकन लेकर इंतजार कर रहे लोग नाराज भी हो गए। कई बार झगड़े के हालात भी पैदा हुए लेकिन लोगों की आपसी सूझ से कहासुनी को रोक लिया गया।

अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए डाक्टर द्वारा लिखा पर्चा या डिस्चार्ज स्लिप की मांग ऐजेंसी संचालकों द्वारा जरूरी कर दी गई है। सेटेलाइट मार्ग पर स्थित गैस ऐजेंसी पर छोटे व बड़े दोनों तरह के सिलेंडर रिफिल किए जा रहे हैं। सिलेंडरों में केवल आधी गैस ही भरी जा रही है।

पहले रुपये लेकर फिर देते हैं टोकन
बड़े सिलेंडर के लिए 400 व छोटे के लिए 300 रुपयों का भुगतान तीमारदारों को करने के बाद टोकन दिया जाता है। इसके लिए लोग सुबह करीब 6 बजे से रिफिल सेंटर पर पहुंच जाते हैं। एजेंसी के संचालक ने बताया कि सिलेंडर लेने व रिफिल कराने के लिए रोज करीब 150 से 200 लोग आ रहे हैं लेकिन हम सिर्फ 80 से 100 लोगों को ही ऑक्सीजन गैस उपलब्ध करा पाते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ सिलेंडर हमारी एजेंसी से जुड़े अस्पतालों में भी सप्लाई करने होते हैं।

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