बरेली: श्मशान घाट पर संक्रमण का खतरा, इस्तेमाल की गयी पीपीई किट बनी परेशानी की वजह
बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल में एक तरफ लोग अपनों की जान बचाने के लिए दर-दर भटक कर ऑक्सीजन सिलेंडर की जुगत लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ परिजनों को उनके अपनों के इस दुनिया से चले जाने के बाद ईंधन के लिए भी हाथ-पैर मारने पड़ रहे हैं। वैश्विक महामारी में मौत का …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल में एक तरफ लोग अपनों की जान बचाने के लिए दर-दर भटक कर ऑक्सीजन सिलेंडर की जुगत लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ परिजनों को उनके अपनों के इस दुनिया से चले जाने के बाद ईंधन के लिए भी हाथ-पैर मारने पड़ रहे हैं। वैश्विक महामारी में मौत का यह तांडव अभी और न जाने कितनी तकलीफें देगा।
वहीं शहर के श्मशान घाट में रोज इतने शवदाह किए जा रहे हैं कि अब जगह भी कम पड़ रही है। इसके विकल्प में लोग अब बदायूं रोड स्थित रामगंगा घाट पर बड़ी संख्या में जुटने लगे हैं। गंगा घाट पर हर रोज करीब 20 से 25 शव दाह संस्कार के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं शहरी क्षेत्र से शवों को गंगा घाट ले जाने वालों को दाह संस्कार के लिए ईंधन न मिलने से काफी परेशानी हो रही है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि ज्यादातर परिजन अंत्येष्टि के लिए आसपास के गांव से लकड़ी व कंडे खरीद कर ला रहे हैं। वहीं कुछ परिजन ऐसे भी हैं जो जानकारी के अभाव में बदायूं रोड स्थित रमपुरा व चांढ़पुर से दोगुनी कीमत पर लकड़ी खरीद कर ला रहे हैं।
प्रशासन की ओर से अभी तक गंगा घाट पर शवों के दाह संस्कार के लिए ईंधन व अंत्येष्टी के बाद पड़ी गंदगी पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ गंगा घाट पर अस्पतालों के कर्मचारी जगह-जगह इस्तेमाल की गई पीपीई किट फेंक रहे हैं। इस वजह से किसानों व घाट पर स्थित मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं में संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है।
