जानिए कौन थे मौलाना नूर आलम, जिनके निधन पर आज इस्लामिक जगत में है शोक की लहर
मेरठ। इस्लामी तालीम के विश्व विख्यात केंद्र दारुल उलूम देवबंद के वरिष्ठ उस्ताद एवं प्रसिद्ध अरबी विद्वान मौलाना नूर आलम खलील अमीनी का बीमारी के चलते रविवार देर रात निधन हो गया। वह 69 वर्ष के थे। मौलाना अमीनी को वर्ष 2018 में अरबी साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित …
मेरठ। इस्लामी तालीम के विश्व विख्यात केंद्र दारुल उलूम देवबंद के वरिष्ठ उस्ताद एवं प्रसिद्ध अरबी विद्वान मौलाना नूर आलम खलील अमीनी का बीमारी के चलते रविवार देर रात निधन हो गया। वह 69 वर्ष के थे। मौलाना अमीनी को वर्ष 2018 में अरबी साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इनके इंतकाल से इस्लामिक जगत में शोक की लहर है।

नूर आलम के बारें में ये बातें नहीं जानते होंगे आप
मौलाना नूर आलम मूलरूप से बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी थे। 18 दिसंबर 1952 को बिहार में जन्मे मौलाना नूर आलम खलील अमीनी का दुनिया के इस्लामिक जगत में बड़ा नाम था। उनके दुनिया भर में हजारों शागिर्द हैं। वे दारुल उलूम में वरिष्ठ उस्ताद होने के साथ-साथ अरबी के बड़े विद्वानों में शामिल थे। दारुल उलूम में अरबी साहित्य के शिक्षक मौलाना अमीनी की पुस्तक मुफ्ता अल-अरबिया विभिन्न मदरसों में दर्स निजामी के पाठ्यक्रम में शामिल है।
राष्ट्रपति के हाथों किए गए थे सम्मानित
अरबी भाषा में सराहनीय सेवाओं के लिए मौलाना नूर आलम खलील अमीनी को वर्ष 2018 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विशेष सम्मान से नवाजा था। मौलाना नूर आलम दारुल उलूम देवबंद में अरबी साहित्य के शिक्षक थे। वह अरबी भाषा के शानदार लेखक थे। मौलाना अमीनी मशहूर अरेबिक मैगजीन अल-दाई के संपादक थे।
इस्लामिक जगत के नामचीन उलमा की अनेकों पुस्तकों का उन्होंने अरबी में अनुवाद भी किया। उनकी पुस्तक, फिलिस्तीन ने सलाहुद्दीन की प्रतीक्षा की, असम विश्वविद्यालय से पीएचडी शोध प्रबंध का विषय रहा। इनके द्वारा लिखी गई किताब मुफ्ता अल-अरबिया देश भर के विभिन्न मदरसों के पाठ्यक्रम में शामिल है। मौलाना के दुनिया भर में हजारों शागिर्द हैं।
मौलाना नूर आलम(फोटो:सोशल मीडिया)
इस्लामिक जगत में शोक की लहर
दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी और जमीयत उलमा-ए- हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी समेत अन्य उलमा ने दुख का इजहार करते हुए मौलाना अमीनी के इंतकाल को दारुल उलूम देवबंद समेत इस्लामिक जगत के लिए बड़ा नुकसान बताया।
