बरेली: न इलाज मिल रहा न ऑक्सीजन, घरों में टूट रहीं मरीजों की सांसें

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली,अमृत विचार। संक्रमण काल में खांसी, बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हालात इतने खराब हो गए हैं कि मरीज को भर्ती करना तो दूर डॉक्टर सर्दी, खांसी के मरीजों को देखने को भी तैयार नहीं हैं। ऐसे में घरों पर अपनों की जान बचाने लिए परिजन ऑक्सीजन के लिए भटक रहे हैं। …

बरेली,अमृत विचार। संक्रमण काल में खांसी, बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हालात इतने खराब हो गए हैं कि मरीज को भर्ती करना तो दूर डॉक्टर सर्दी, खांसी के मरीजों को देखने को भी तैयार नहीं हैं। ऐसे में घरों पर अपनों की जान बचाने लिए परिजन ऑक्सीजन के लिए भटक रहे हैं। कोविड हेल्प लाइन के नंबरों पर या तो फोन लग नहीं रहे हैं या फिर सहायता नहीं मिल रही है। ऐसी स्थिति में दवा,उपचार के अभाव में लोग अस्पताल जाने से पहले ही घरों में दम तोड़ रहे हैं। बरेली में उपचार के अभाव में रोज कई मौतें हो रही हैं।

डोहरिया निवासी संजीव पटेल को समय रहते यदि उपचार व ऑक्सीजन मिल जाती तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। भाई नरेंद्र ने बताया कि अगर उनके भाई को समय से ऑक्सीजन व उपचार मिल जाता तो उसकी जान बच जाती। बताया कि सांस लेने में दिक्कत होने के बाद चिकित्सकों से मदद मांगी थी, लेकिन उनके इलाज के लिए कोई चिकित्सक नहीं मिला और आखिरकार ऑक्सीजन का लेवल लगातार घटता गया और उनकी मौत हो गई।

प्रेम नगर निवासी अनिल सूद के परिजन बेड दिलाने के लिए शहर में इस अस्पताल से उस अस्पताल तक भटकते रहे थे। न तो उन्हें कहीं बेड मिला और न ही ऑक्सीजन ही मिल पाई। परिजन रोते बिलखते रहे और उन्हीं के सामने घर पर ही तड़प-तड़प कर उनकी सांस टूट गई।

केस-1
कुतुबखाना निवासी मोहम्मद आरिफ अंसारी को पहले बुखार आया, फिर सांस लेने में दिक्कत शुरू हो गई। हालात बिगड़ने पर परिजनों ने पहले उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए, जहां कोरोना की जांच न होने की वजह से लौटा दिया गया। इसके बाद अन्य जगह गए तो मालूम हुआ कि बेड खाली नहीं है। अपना नंबर नोट करा दीजिए बेड खाली होते ही आपको सूचित कर बुला लिया जाएगा। तब तक घर पर ही मरीज को आइसोलेट रखिए और ऑक्सीजन देते रहिए। परिजनों के मुताबिक शहरभर में ऑक्सीजन के लिए मारे-मारे फिरते रहे, लेकिन ऑक्सीजन का इंतजाम नहीं हो पाया और मोहम्मद आरिफ अंसारी की हालत अधिक बिगड़ गई जिसके बाद उनकी मौत हो गई।

केस-2
सैलानी निवासी मौहम्मद राशिद मजदूरी का कार्य करते थे। उनको दो दिन बुखार आया। फिर सांस लेने में दिक्कत होने लगी। बेटे साबिर ने बताया कि निजी नर्सिंग होम पर लेकर गए जहां चिकित्सकों ने देखने से मना कर दिया। लोगों ने कोविड अस्पताल ले जाने की सलाह दी। 300 बेड अस्पताल पहुंचे लेकिन वहां बेड नहीं मिला। वहां से निजी मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया, लेकिन वहां भी यही हालत थी। ऐसे में दवाईयों के साथ घर भेज दिया गया, लेकिन ऑक्सीजन लेवल लगातार गिरता जा रहा था। रात्रि को तबियत अधिक खराब होने पर एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन डेढ़ घंटे से अधिक समय निकल जाने के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। बताया कि कोविड हेल्प लाइन पर ऑक्सीजन की मदद मांगी, लेकिन वहां से ऑक्सीजन न होने की बात कही गई। रात में ही उनकी मौत हो गई।

केस-3
कटरा चांद खां में किराए पर रहने वाले राजीव की मौत भी घर पर तड़प तड़प कर हो गई। बुखार के बाद ऑक्सीजन लेवल घटने लगा तब परिजनों ने एंबुलेंस की गुहार लगाना शुरू किया। घंटों चीखने, गिड़गिड़ाने के बाद भी एंबुलेंस की मदद नहीं मिल सकी। अंतत: राजीव की मौत हो गई।

संबंधित समाचार