बरेली: जान बचाने वाला रेमडिसिविर बन गया जानलेवा, लगाने पर संक्रमितों की हालत गंभीर
बरेली, अमृत विचार। 300 बेड कोविड अस्प्ताल में शनिवार को भर्ती संक्रमित मरीजों की जान उस वक्त सांशत में पड़ गई, जब रेमिडिसिवर इंजेक्शन लगाए जाने पर उनकी हालत गंभीर हो गई। चिकित्सकों ने बाद में डेक्सामीटासोन इंजेक्शन लगाया तब जाकर मरीजों को राहत मिल सकी। मरीजों की हालत बिगड़़ने पर खलबली मच गई। अब …
बरेली, अमृत विचार। 300 बेड कोविड अस्प्ताल में शनिवार को भर्ती संक्रमित मरीजों की जान उस वक्त सांशत में पड़ गई, जब रेमिडिसिवर इंजेक्शन लगाए जाने पर उनकी हालत गंभीर हो गई। चिकित्सकों ने बाद में डेक्सामीटासोन इंजेक्शन लगाया तब जाकर मरीजों को राहत मिल सकी। मरीजों की हालत बिगड़़ने पर खलबली मच गई। अब इंजेक्शन का इस्तेमाल रोक दिया गया है और इंजेक्शन वापसी को लेकर सीएमएस को पत्र लिखा गया है।
शासन की ओर से जिले में रेमिडिसिविर के 400 इंजेक्शन 8 मई को भेजे थे। संक्रमित मरीजों की तेजी से गिरते ऑक्सीजन लेवल की वजह से एक बार तो रेमिडिसिविर इंजेक्शन की किल्लत हो गई कि ब्लैक में बिकने लगा। शासन की ओर से इस इंजेक्शन को लिक्विड रूप में भेजा गया है।
जरूरतमंद मरीजों को इंजेक्शन लगाकर उनके ऑक्सीजन लेवल को स्थिर रखा जा रहा है। लेकिन शनिवार को 300 बेड अस्पताल के आईसीयू में भर्ती संक्रमित मरीजों का ऑक्सीजन लेवल स्थिर रखने के लिए चिकित्सकों ने जब रेमिडिसिविर इंजेक्शन लगाए तो मरीजों के शरीर में यकायक कंपकंपी छूटने लगी। इंजेक्शन के रिएक्शन की बात दिमाग में कौंधते ही चिकित्सकों ने डेक्सामीटासोन इंजेक्शन लगा उनकी हालत स्थिर की।
सीएमएस को पत्र लिख इंजेक्शन बदलने की मांग
रेमिडिसिविर इंजेक्शन लगने के बाद मरीजों की हालत बिगड़ने का मामला पूरे दिन अस्पताल में चर्चाओं का विषय बना रहा। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों में भी डर था कि कहीं किसी गंभीर मरीज को लगाने के बाद हालात अधिक न बिगड़ जाए जिससे उसकी मौत हो जाए। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सीएमएस को चिकित्सकों ने पत्र दिया है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने रेमिडिसिविर इंजेक्शन को बदलने की मांग की है।
300 बेड कोविड अस्पताल में रोके गए रेमिडिसिविर इंजेक्शन
शनिवार को रेमिडिसिविर इंजेक्शन से मरीजों की हालत खराब होने पर 300 बेड कोविड अस्पताल में गंभीर मरीजों को इस इंजेक्शन को लगाए जाने से रोक दिया गया है। चिकित्सकों की मानें तो इंजेक्शन में यह राइवर ऊपर से भी आ रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक पहले पाउडर फार्मूले में यह इंजेक्शन आता था, जिसमें पानी मिलाकर घोलकर यह लगाया जाता था। लेकिन इस बार शासन से लिक्विड इंजेक्शन भेजे गए हैं, शायद यह भी एक कारण हो सकता है।
