बरेली: कोरोना काल में कई गुना ज्यादा मौतें, सरकारी रिकॉर्ड जमीनी हकीकत से दूर

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बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल में जहां मरने वालों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ गई थी। इसके बावजूद नगर निगम में मृतकों के बारे में दी गईं सूचनाएं जमीनी हकीकत से दूर दिखाई दे रही है। कोरोना की दूसरी लहर आने से पहले जनवरी व फरवरी में और उसके बाद दूसरी …

बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल में जहां मरने वालों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ गई थी। इसके बावजूद नगर निगम में मृतकों के बारे में दी गईं सूचनाएं जमीनी हकीकत से दूर दिखाई दे रही है। कोरोना की दूसरी लहर आने से पहले जनवरी व फरवरी में और उसके बाद दूसरी लहर का प्रभाव शुरू होने के बाद मृतकों की संख्या में नगर निगम के रिकार्ड के मुताबिक मामूली फर्क ही है।

यह आंकड़ा हैरान करने वाला है। जबकि नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कोरोना की वजह से मौतें ज्यादा होने के बावजूद संक्रमण के खतरे के देखते हुए मृतकों के परिजन मुत्यु प्रमाण पत्र ही बनवाने नहीं आ रहे हैं। ऐसे में मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने की संख्या में बाद में बढ़ोतरी होने के आसार हैं।

कोरोना संक्रमण के खतरे के बाद शहरी क्षेत्र में मृत्यु दर में काफी बढ़ोतरी हो गई थी। शहर के संजयनगर, सिटी श्मशान व गुलाबबाड़ी श्मशान स्थलों पर हर दिन लाए जाने वाले शवों की तादाद में तीन से चार गुना तक वृद्धि हुई थी। इस आधार पर अंदाजा लगाया जा रहा था कि नगर निगम में मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने वालों की संख्या इस दरम्यान काफी बढ़ गई होगी लेकिन निगम की रिपोर्ट तो कुछ और ही बता रही है।

रिकार्ड के मुकाबले जनवरी, फरवरी व मार्च में जारी हुए मृत्यु प्रमाण पत्र कोरोना का जबरदस्त प्रकोप बढ़ने के बाद अप्रैल और मई अब तक जारी हुए प्रमाणपत्रों से ज्यादा तो हैं लेकिन जो मृत्यु जमीनी पर दिखाई दे रही, वो अभी आंकड़ों में नहीं दिखाई दे रही है। इसके पीछे वजह बताई जा रही है कि संक्रमण के डर के चलते मृतकों के परिजन मृत्यु प्रमाणपत्र की औपचारिकता ही पूरी नहीं कराने आ रहे हैं। ऐसे में मृत्यु के आंकड़ों की संख्या बाद में बढ़ने के आसार हैं।

निजी अस्पताल व घरों में मरने वालों की आती है सूचनाएं
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि वहां केवल निजी अस्पताल और घरों पर मरने वालों की ही सूचनाएं आती हैं। इन्हीं मृतकों के मृत्यु प्रमाणपत्र भी जारी होते हैं। जबकि जिला अस्पताल, 300 बेड हॉस्पिटल, रेलवे, राजश्री मेडिकल कॉलेज, एसआरएमएस व कैंट आदि एरिया में मृतकों के सर्टिफिकेट वहीं से बनते हैं। इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को सीधे भेजी जाती हैं।

इस साल नगर निगम से जारी हुए मृत्यु प्रमाणपत्रों की संख्या
माह मृत्यु प्रमाण पत्रों की संख्या
जनवरी 967
फरवरी 871
मार्च 728
अप्रैल 1034
मई (अब तक) 700

नगर निगम ने जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र ऑनलाइन बनाने को तय किए केंद्र
1-सीएसएस यानी जनसेवा केंद्र तहसीन हसन खां, रोहली टोला, कांकर टोला, पुराना शहर
2-सीएसएस जहांगीर स्थित चकमहमूद निकट चक चुंगी केंद्र।
3-सीएससी जफीर फरीदापुर चौधरी, इज्जतनगर
4-सीएससी अथर सऊद फूलवालान किला केंद्र
5-सीएससी नावेद रजा खां, बिहारीपुर मेमरान
6-सीएससी घेर जाफर खा, उवैद खां, बरेली
7-विधौलिया सीबीगंज रहमान गेट, बरेली
8-सीएससी केंद्र आलमगिरीगंज अमन।

“मृत्यु प्रमाणपत्र अगर कम संख्या में बने हैं तो लोगों ने इसके लिए आवेदन ही कम किए होंगे। ऐसा वो क्यों कर रहे हैं, यह कहना मुश्किल है लेकिन जो भी ऑनलाइन आवेदन कर रहा है, उसके प्रमाणपत्र जल्द ही बनाए जा रहे हैं।” -अजीत कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त

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