मुसीबत बढ़ी
कहावत है कि मुसीबत कभी भी अकेले नहीं आती। ऐसे में जब देश कोरोना महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा है। कोरोना संक्रमण से प्रतिदिन लाखों लोग बीमार पर पड़ रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है। हमारी अर्थव्यवस्था भी संकटग्रस्त है। छात्रों की पढ़ाई-लिखाई ठीक से नहीं हो …
कहावत है कि मुसीबत कभी भी अकेले नहीं आती। ऐसे में जब देश कोरोना महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा है। कोरोना संक्रमण से प्रतिदिन लाखों लोग बीमार पर पड़ रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है। हमारी अर्थव्यवस्था भी संकटग्रस्त है। छात्रों की पढ़ाई-लिखाई ठीक से नहीं हो रही है और अन्य बीमारियों से जूझते लोगों को ठीक से उपचार नहीं मिल पा रहा है। देश का समूचा ध्यान महामारी की रोकथाम पर है। ऐसी स्थिति में ब्लैक फंगस यानी म्युकर माइकोसिस बीमारी का फैलना चिंताजनक है। इस बीमारी ने स्वास्थ्य विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
कोरोना संक्रमण के दौरान या ठीक होने के बाद यह बीमारी संक्रमित की आंख को निशाना बनाती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी कोरोना वायरस से ठीक हुए मधुमेह के रोगियों में अधिक हो रही है। इस बीमारी में पीड़ित की आंखों की रोशनी जाने के साथ ही जबड़े तक को निकालने की नौबत आ रही है। कुछ मामलों में ब्लैक फंगस का असर दिमाग और फेफड़ों पर भी पड़ता है। हालांकि इसके मरीजों की संख्या अभी कम है, लेकिन अनेक राज्यों में मरीजों के मिलने से स्वास्थ्य तंत्र सचेत हो गया है।
राजस्थान सरकार ने बुधवार को ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया। देश में ब्लैक फंगस से प्रभावित सर्वाधिक 1500 मामले महाराष्ट्र में आए हैं। उत्तर प्रदेश, राजस्थान व हरियाणा में भी प्रभावितों की संख्या 100 से 150 है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में ब्लैक फंगस की स्थिति की जानकारी लेते हुए सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों को देखते हुए कोविड अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है।
इस बीमारी के बारे में चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ आम लोगों में भी जागरुकता बढ़ाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। अस्पतालों में विशेष उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जाए। सीएचसी और पीएचसी स्तर पर उपचार की व्यवस्थाओं को युद्ध स्तर पर सुदृढ़ बनाया जाए। इसके उपचार में उपयोगी दवाओं की उपलब्धता तत्काल सुनिश्चित कराई जानी चाहिए।
हालांकि लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने आवश्यक गाइडलाइन जारी कर दी है। फंगस से संक्रमित होने के शुरुआती लक्षण सामने आते ही बीमारी को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि लापरवाही भारी पड़ सकती है। ब्लैक फंगस कितना संक्रामक है, उसके उपचार और इससे बचाव के लिए क्या उपाय होने चाहिए, इस पर शोध को बढ़ावा देना भी जरूरी है।
