तूफान से सबक

तूफान से सबक

महाराष्ट्र और गोवा सहित छह राज्यों में चक्रवाती तूफान की वजह से नुकसान पहुंचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चक्रवात प्रभावित गुजरात का दौरा किया और राज्य को राहत कार्य के लिए एक हजार करोड़ रुपये की सहायता देने की घोषणा की। मौसम विज्ञान की उन्नति के चलते तूफान की सूचना समय रहते मिलने और …

महाराष्ट्र और गोवा सहित छह राज्यों में चक्रवाती तूफान की वजह से नुकसान पहुंचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चक्रवात प्रभावित गुजरात का दौरा किया और राज्य को राहत कार्य के लिए एक हजार करोड़ रुपये की सहायता देने की घोषणा की। मौसम विज्ञान की उन्नति के चलते तूफान की सूचना समय रहते मिलने और पिछली तबाहियों से सबक लेते हुए व्यापक स्तर पर बचाव की तैयारियां कर ली गई थीं। इस वजह से हताहतों की संख्या वैसी भयावह नहीं रही जैसी ऐसे तूफानों में आम तौर पर होती है।

विभिन्न राज्यों में तटवर्ती इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहले ही पहुंचा दिया गया था। गुजरात में निचले तटीय क्षेत्रों से करीब डेढ़ लाख से अधिक लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया था। इतना ही नहीं, काफी संख्या में कोविड-19 के मरीजों को भी सुरक्षा कारणों से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया गया। बाम्बे हाई के निकट तेल क्षेत्र में एक जहाज के डूबने और नौसेना के युद्धपोतों के प्रयास से बड़ी संख्या में लोगों को तो बचा लिया गया लेकिन कुछ जिंदगियों को तूफान लील गया।

बहरहाल, अरब सागर से उठा यह चक्रवाती तूफान दक्षिण-पश्चिमी राज्यों में निजी व सार्वजनिक संपत्तियों को काफी नुकसान पहुंचा गया। बहरहाल, कोरोना की दूसरी लहर के मुश्किल समय में इस तूफान का आना राज्यों की मुसीबतों को कई गुना बढ़ा गया।

कोरोना के खिलाफ जारी राज्यों की मुहिम पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। महाराष्ट्र व गुजरात पहले ही सर्वाधिक कोरोना संक्रमण प्रभावित राज्यों में शुमार हैं। चक्रवाती तूफान की वजह से कई इलाकों में टीकाकरण कार्यक्रम को भी रोका गया। लेकिन ये चक्रवाती तूफान हमें कई सबक भी देकर गया है। यह सबक आगे की चुनौतियों से निपटने में हमारी मदद करेगा। अरब महासागर में आमतौर पर लक्षद्वीप से चक्रवात उठता है, जो पश्चिम की तरफ बढ़ता है और भारत के दूर पश्चिमी तटों से टकराता है। लेकिन बीते सालों में देखा जा रहा है कि अरब महासागर भी गर्म होता जा रहा है, जिसकी वजह से यहां चक्रवात ज्यादा आ रहे हैं।

मौसम विज्ञानी उसे ग्लोबल वार्मिंग से जोड़ कर देख रहे हैं। जलवायु परिवर्तन का संकट हमारे जीवन को सीधे प्रभावित करेगा। इसलिए जलवायु परिवर्तन और गर्म समुद्री लहरों जैसे कारकों के चलते हमें ऐसे और तूफानों का सामना करने को तैयार रहना पड़ेगा। जब जलवायु परिवर्तन के वैश्विक संकट में लगातार वृद्धि हो रही है तो संरचनात्मक विकास का ढांचा इसी के अनुरूप विकसित करने की जरूरत है। तभी जन-धन की हानि को कम किया जा सकेगा।

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