पीलीभीत के सीएमएस निलंबित, एल टू प्रभारी के खिलाफ जांच

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पीलीभीत,अमृत विचार। जिला संयुक्त चिकित्सालय में कोविड-19 विपदा के दौरान ऑक्सीजन की कमी तो रही लेकिन वेंटिलेटर होते हुए भी उनका उपयोग नहीं किया गया। इसकी वजह से दर्जनों मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ी। प्रधानमंत्री केयर फंड से मिले 12 वेंटिलेटर सहित कुल 16 वेंटीलेटर अस्पताल के कोने में पड़े रहे। स्वास्थ्य विभाग ने …

पीलीभीत,अमृत विचार। जिला संयुक्त चिकित्सालय में कोविड-19 विपदा के दौरान ऑक्सीजन की कमी तो रही लेकिन वेंटिलेटर होते हुए भी उनका उपयोग नहीं किया गया। इसकी वजह से दर्जनों मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ी। प्रधानमंत्री केयर फंड से मिले 12 वेंटिलेटर सहित कुल 16 वेंटीलेटर अस्पताल के कोने में पड़े रहे। स्वास्थ्य विभाग ने यह कहकर अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर ली कि वेंटीलेटर का इस्तेमाल करने के लिए उनके पास टेक्निकल स्टाफ ही नहीं है।

अमृत विचार ने जब स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही को सार्वजनिक किया तो प्रकरण शासन तक पहुंचा। इधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वेंटीलेटर का उपयोग न होने पर राज्यों के प्रति नाराजगी जताई तो प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद शासन ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रतन पाल सिंह सुमन को निलंबित कर दिया जबकि कोविड-19 अस्पताल के प्रभारी डॉ. राजेश कुमार के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई। स्वास्थ्य निदेशक प्रशासन डॉ. राजेश के खिलाफ जांच करेंगे।

कोविड काल में अचानक गंभीर मरीजों की हालत में इजाफा हुआ तो अस्पताल मरीजों से भर गए। तुरंत ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ने लगी । साधन संपन्न मरीजों के परिजन तो किसी तरह जिले से बाहर अपने मरीजों को इलाज के लिए ले गए लेकिन जिला अस्पताल में भी बड़ी संख्या में कोरोना के मरीज पहुंचे। यहां एल टू अस्पताल स्थापित कर दिया गया। अस्पताल में मरीज भर्ती तो कर लिए गए लेकिन पहले तो ऑक्सीजन की कमी आड़े आई और फिर जब मरीज ज्यादा सीरियस हुए तो वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। अस्पताल में मरीजों को वेंटीलेटर पर रखने से इंकार कर दिया गया ।

स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना था कि उनके पास वेंटिलेटर तो हैं लेकिन उसको संचालित करने के लिए टेक्निकल स्टाफ नहीं है। जिला अस्पताल में चार वेंटिलेटर पहले से हैं जबकि 12 वेंटीलेटर प्रधानमंत्री केयर फंड से उपलब्ध कराए गए। यह सभी 16 वेंटीलेटर जिला अस्पताल में शोपीस बने रहे। प्रशासन की काफी सख्ती के बाद भी वेंटिलेटर का इस्तेमाल शुरू नहीं हो सका। इसकी बजह से दर्जनों मरीजों ने दम तोड़ दिया। मौत का आंकड़ा 150 को पार कर गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दिनों वेंटीलेटर्स का उपयोग न होने पर चिंता और नाराजगी जताई थी और मुख्यमंत्रियों से वेंटिलेटर का उपयोग मरीजों की जान बचाने के लिए सुनिश्चित कराने को कहा। प्रधानमंत्री के दखल के बाद रकत में आए शासन ने आनन-फानन में विस्तृत रिपोर्ट सभी जिलों से मांगी। पीलीभीत में वेंटिलेटर का इस्तेमाल न होने को शासन ने गंभीरता से लिया। इसे बड़ी लापरवाही मानकर कड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ रतन पाल सिंह सुमन को निलंबित कर दिया। उनको बरेली अपर महानिदेशक स्वास्थ्य कार्यालय से संबद्ध किया गया है।

वहीं एल टू अस्पताल के प्रभारी डॉ राजेश कुमार के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए। उनके खिलाफ यह जांच स्वास्थ्य निदेशक प्रशासन को सौंपी गई है। फिलहाल शासन की सख्त कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य महकमे में अफरा तफरी है। एक और बड़े अफसर पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।

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