हादसा हुआ ऐसा, जिस पर मुश्किल से कर पाएंगे आप भरोसा, गुजरी ट्रेन, हिलने लगा स्टेशन और फिर…
नई दिल्ली, अमृत विचार। तेज रफ्तार पुष्पक एक्सप्रेस के गुजरने से मध्य रेलवे के चांदनी रेलवे स्टेशन की इमारत बुधवार, 26 मई को अचानक बुरी तरह तब हिलने लगी और देखते-देखते उसका आगे का हिस्सा भरभरा के गिर गया। भुसावल मंडल, का यह रेलवे स्टेशन 17 साल पहले 2004 में बनाया गया था। हादसे के …
नई दिल्ली, अमृत विचार। तेज रफ्तार पुष्पक एक्सप्रेस के गुजरने से मध्य रेलवे के चांदनी रेलवे स्टेशन की इमारत बुधवार, 26 मई को अचानक बुरी तरह तब हिलने लगी और देखते-देखते उसका आगे का हिस्सा भरभरा के गिर गया। भुसावल मंडल, का यह रेलवे स्टेशन 17 साल पहले 2004 में बनाया गया था। हादसे के कारण लगभग दर्जन भर ट्रेनें प्रभावित हुईं। स्टेशन के अंदर का मलबा कंट्रोल पैनल पर गिरने से पूरा रिले-सिस्टम तत्काल ठप हो गया और स्टेशन भवन की सभी खिड़कियों के शीशे टूटकर बिखर गए। रेलवे में ये अपनी किस्म का पहला हादसा है।
सौभाग्य से स्टेशन अधीक्षक प्रदीप पवार जो कि पुष्पक एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने के लिए स्टेशन भवन से निकलकर प्लेटफार्म पर खड़े थे, हादसे का शिकार होने से बच गए। छोटा स्टेशन होने के कारण प्लेटफार्म पर यात्रियों की कोई भीड़ नहीं थी, इसलिए कोई भी जनहानि नहीं हुई। उक्त स्टेशन से गुजरने वाली सभी रेल गाड़ियों को कॉशन ऑर्डर से पास किया गया और बृहस्पतिवार से स्टेशन का पूरा स्टाफ प्लेटफार्म पर खुले में बैठकर काम कर रहा है।

इस बीच पूरी तरह हिल गए और टूटकर बिखर गए स्टेशन भवन को तोड़कर उसका मलबा हटाने और नया स्टेशन भवन बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। भुसावल मंडल के सभी संबंधित अधिकारी चांदनी रेलवे स्टेशन पर उपस्थित रहकर इस कार्य की व्यक्तिगत तौर पर निगरानी कर रहे हैं। और हादसे से हुए नुकसान को साधारण बताकर लीपापोती में जुट गए हैं।
मालूम हो कि गत सप्ताह तौकते तूफान के कारण गुजरात के नवनिर्मित केवड़िया रेलवे स्टेशन की छत सूखे पत्तों की तरह उड़ते देखी गई थी। कहने को कहा जा सकता है कि तूफान बहुत तेज था, पर कोई नया निर्माण कार्य इस तरह से चरमरा जाए, ऐसा भी होते हुए इससे पहले नहीं देखा गया।
इससे पहले बंगलौर का नया रेलवे स्टेशन भवन मामूली बरसात में ही पानी-पानी हो गया था। जबकि इसके अत्याधुनिक स्टेशन होने का दावा किया गया था। कुछ अन्य आलीशान रेलवे स्टेशनों का भी यही हाल है, जो पिछले सालों में बनाए गए हैं।
