स्टार्टअप रोजगार

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Edited By Amrit Vichar
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कोरोना की दूसरी लहर ने पूरे उद्योग जगत को नुकसान पहुंचाया है। इससे स्टार्टअप योजनाओं की प्रगति भी थम गई। इस योजना की शुरुआत अच्छी रही थी, परंतु पिछले दो वित्तीय वर्ष के दौरान कोरोना ने स्टार्ट अप के जरिए रोजगार करने वालों की हिम्मत तोड़ दी। इसमें श्रमिकों की बड़ी समस्या सामने आई है। …

कोरोना की दूसरी लहर ने पूरे उद्योग जगत को नुकसान पहुंचाया है। इससे स्टार्टअप योजनाओं की प्रगति भी थम गई। इस योजना की शुरुआत अच्छी रही थी, परंतु पिछले दो वित्तीय वर्ष के दौरान कोरोना ने स्टार्ट अप के जरिए रोजगार करने वालों की हिम्मत तोड़ दी। इसमें श्रमिकों की बड़ी समस्या सामने आई है।

इस बीच गुरुवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बताया कि देश में युवा उद्यमियों के मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या 50 हजार तक पहुंच गई है। इनमें से 10 हजार स्टार्टअप केवल पिछले 180 दिनों में अस्तित्व में आए हैं। यानि कोरोना काल में भी काफी लोग स्टार्ट अप के तहत नई योजनाओं की तरफ आकर्षित हुए। मान्यता प्राप्त स्टार्टअप अब 623 जिलों में फैल गए हैं। कहा जा रहा है कि मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स ने रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2020-2021 में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप ने लगभग 1.7 लाख नौकरियां सृजित की हैं। देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने स्टार्टअप को सहयोग देने के लिए विशिष्ट स्टार्टअप नीतियों की घोषणा की है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और गुजरात में स्टार्टअप की संख्या सबसे ज्यादा है। ‘खाद्य प्रसंस्करण’, ‘उत्पाद विकास’, ‘अनुप्रयोग विकास’, ‘आईटी परामर्श’ और ‘व्यावसायिक सहायता सेवाएं’ में सर्वाधिक स्टार्ट अप स्थापित किए गए हैं। इनमें से 45 प्रतिशत स्टार्टअप का नेतृत्व महिला उद्यमी कर रही है।

केंद्र सरकार ने रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए स्टार्टअप योजना की शुरुआत 2016 में की थी। योजना शुरु होने बाद उम्मीद जताई गई थी कि यह योजना युवाओं की तकदीर और देश की तस्वीर बदल देगी। स्टार्टअप योजना के तहत मिले लोन और अन्य तरह की आर्थिक छूट की बदौलत बेरोजगारी की समस्या भी कम होगी।

पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश सरकार ने यूपी स्टार्टअप योजना 2020 को मंजूरी दी। सीएम योगी ने प्रदेश में 10 हजार से भी अधिक स्टार्टअप स्थापित करने का लक्ष्य रखा था। प्रदेश सरकार ने सिडबी को 15 करोड़ की प्रथम किस्त भी दे दी। अब सुस्त पड़ी योजनाओं को गति दिए जाने की जरूरत है। लॉकडाउन के बाद अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश लौटे श्रमिकों के कौशल का उपयोग स्टार्ट अप के जरिए किया जा सकता है।

कोशिश की जानी चाहिए कि प्रवासी श्रमिकों को स्टार्टअप ऐसी नौकरियां उपलब्ध करा सकें जो उनके वर्क-प्रोफाइल के अनुरूप हों और विभिन्न क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिल सके। साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं को गांव तक पहुंचाना है तो स्वास्थ्य क्षेत्र के स्टार्टअप पर फोकस किया जा सकता है। स्वास्थ्य क्षेत्र में कुछ नया किया जा सकता है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।