25 शवों की पहचान को चार साल बाद भी डीएनए रिपोर्ट का इंतजार
अनिल कुमार, बरेली। चार-पांच जून, 2017 की रात करीब 1 बजे का वक्त था। बस में सवार अधिकांश सवारियां नींद में थीं, अचानक तेज आवाज आयी और फिर आग में 25 जिंदगियां राख हो गईं। तेज झटके में नींद तो टूट गई। जान बचाने की जद्दोजहद भी हुई लेकिन कोई फायदा नहीं हो सका। हम …
अनिल कुमार, बरेली। चार-पांच जून, 2017 की रात करीब 1 बजे का वक्त था। बस में सवार अधिकांश सवारियां नींद में थीं, अचानक तेज आवाज आयी और फिर आग में 25 जिंदगियां राख हो गईं। तेज झटके में नींद तो टूट गई। जान बचाने की जद्दोजहद भी हुई लेकिन कोई फायदा नहीं हो सका। हम बात कर रहे हैं आज से ठीक चार साल पहले बिथरी चैनपुर क्षेत्र के बड़ा बाईपास स्थित इन्वर्टिस तिराहे पर हुए बस अग्निकांड की। इस हादसे को याद कर आज भी रुह कांप जाती है और आंखें नम हो जाती हैं।
4-5 जून 2017 की रात में करीब 1 बजे अचानक बड़ा बाईपास पर चढ़ते वक्त तेज रफ्तार ट्रक ने बस में टक्कर मार दी थी। हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों ने किसी तरह से अपनों की पहचान कर अंतिम संस्कार कर दिया। सभी सवार अधिकाशं गोंडा, लखनऊ, बलरामपुर व लखीमपुर जिले के थे।
केंद्र व राज्य सरकार के अलावा रोडवेज से मुआवजा भी परिजनों को दे दिया गया, लेकिन चार साल बाद भी डीएनए रिपोर्ट का इंतजार है। डीएनए जांच कराने के पीछे यह मकसद था कि आग में जलकर राख हुआ शव किसका था और किस शव का अंतिम सस्कार किसने किया। पुलिस ने डीएनए रिपोर्ट के लिए कई रिमांडर भेजे हैं। अंतिम रिमांइडर 18 मार्च, 2021 को भेजा गया था।
उस रात में गोंडा डिपो की यूपी 43 टी 5978 नंबर की बस दिल्ली से गोंडा जा रही थी। बस में 37 सवारियों समेत 41 लोग सवार थे। रात करीब साढ़े 12 बजे जैसे ही इन्वर्टिस तिराहा पर बड़ा बाईपास पर चढ़ रही थी तभी फरीदपुर की ओर से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने बस में टक्कर मार दी ।
बस के डीजल टैंक के पास टक्कर होने से टैंक फट गया था और आग लग गई थी। टक्कर इतनी तेज थी कि बस का मुख्य दरवाजा बंद हो गया था। बस के चालक और परिचाकर कूदकर सवारियों को मरने के लिए छोड़कर भाग गए थे। जो लोग फंस गए थे, वह बस के अंदर ही जिंदा जल गए थे। 15 लोगों ने बस की खिड़कियों से कूदकर जान बचाई थी। मौके पर 24 सवारियां जिंदा जल गई थीं और एक की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
बस में हर जगह पड़ी थी लाश
हादसे की सूचना पर थाने की पुलिस के साथ तत्कालीन एसपी सिटी एवं वर्तमान एसएसपी रोहित सिंह सजवाण और तत्कालीन आईजी विजय सिंह मीणा मौके पर पहुंचे थे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। आग की तेज लपटों की वजह से किसी को भी बाहर नहीं निकाला जा सका था। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया था तो बस के अंदर 24 यात्रियों की चिता बन गई थी।
बस के अंदर गेट, खिड़की, फर्श और गैलरी सभी जगह किसी न किसी की लाश पड़ी थी। बस का गेट खोलते ही शव नीचे गिरने लगे थे। दो बच्चों के शव तो मां से चिपके हुए थे। हादसे के बाद शवों की पहचान को लेकर सवाल उठने लगे थे। कई परिजनों ने शवों की पहचान कर ली थी लेकिन गलत दावेदार भी आ गए थे। उसके बाद सभी की पहचान के लिए डीएनए सैंपल लिए गए थे और जांच के लिए भेजे थे लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं आयी है।
यह थे हादसे के जिम्मेदार
बस अग्निकांड के जिम्मेदार अकेला ट्रक चालक ही नहीं था, बल्कि बस चालक व परिचालक भी थे। उस वक्त बस में परिचालक अख्तर अजीज फारूखी और संविदा चालक सुंदरलाल यादव, चालक चंद्रशेखर शुक्ला और चंद्रशेखर का नाती भी मौजूद थे। रामपुर से बस को सुंदरलाल यादव चला रहे थे। चालक बस से कूदकर फरार हो गया था। ट्रक का चालक भी फरार हो गया था जिसे दूसरे दिन पकड़ा गया था। बस चालक ने कोर्ट में सरेंडर किया था और उसे सस्पेंड किया गया था।
उसकी जब आंखों की जांच हुई थी तो दृष्टि दोष पाया गया था। बावजूद इसके उसे बस चलाने के लिए दी गई थी। बस हादसे में टैक्सी ड्राइवर शेरसिंह का तो पूरा परिवार ही उजड़ गया था। हादसे में उसके पिता जयवीर, मां शिव कुमारी, पत्नी सरिता सिंह, 4 वर्षीय बेटा रणवीर सिंह और छह माह की बेटी गुंजन की मौत हो गई थी। इसी तरह हादसे में किसी ने अपना पिता तो किसी ने भाई तो किसी कोई खास खो दिया था।
इन लोगों की गई थी जान
शिव कुमारी, जदवीर सिंह, सरिता सिंह, रणवीर सिंह, गुंजन, शकुंतला, प्रभात उर्फ लवकुश, छोटे लाल, अनिल, परशुराम जैसवाल, राघवेन्द्र सिंह, माया, हरीश, राकेश भंडारी, उमाशंकर, कलावती, दीपक, निशा, त्रिवेणी, राजन, अमित सिंह, श्रीकृष्ण, चंद्रभान उर्फ नंदन, तरुण, कमला देवी।
पुलिस ने दिखाई थी इंसानियत
एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने बताया कि सूचना मिलने पर तुरंत फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे थे। यात्रियों को बचाने के प्रयास भी किए लेकिन 25 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी थी। आज भी खौफनाक मंजर सामने आ जाता है। परिजनों ने शवों की पहचान की थी। डीएनए सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए थे। डीएनए रिपोर्ट के लिए रिमाइंडर भेजे गए हैं। एक बार फिर से रिमांडर भेजा जाएगा।
