गिरती अर्थव्यवस्था
कोरोना महामारी की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट देखी जा रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020-21 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार में 7.3 फीसदी का संकुचन हुआ है, जिसमें पिछले वित्त वर्ष में चार फीसदी की दर से वृद्धि दर्ज हुई थी। यह अप्रत्याशित नहीं है, क्योंकि …
कोरोना महामारी की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट देखी जा रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020-21 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार में 7.3 फीसदी का संकुचन हुआ है, जिसमें पिछले वित्त वर्ष में चार फीसदी की दर से वृद्धि दर्ज हुई थी। यह अप्रत्याशित नहीं है, क्योंकि वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर में माइनस 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, जो बाकी की तीन तिमाहियों में संभली। चौथी तिमाही में विकास दर का धनात्मक होना अच्छा संकेत कहा जा सकता है।
दरअसल जनवरी और फरवरी में अर्थव्यवस्था पूरी तरह से खुल गई थी। लॉकडाउन राज्यों से हट गया था। इस दौरान इसमें बढ़त देखी जा सकती है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि जनवरी, फरवरी, मार्च में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का कलेक्शन भी अच्छा रहा है जो एक लाख करोड़ रुपए से ऊपर था। दरअसल, जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही थी, दूसरी लहर की भयावहता ने देश की आर्थिकी को बड़ी चोट दी है। पिछले 40 साल में अर्थव्यवस्था सबसे खराब दौर से गुजर रही है, फिर भी हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ताजा आर्थिक आंकड़े उस संकट काल के हैं, जिसमें पूरी दुनिया कराह रही है। फिर भी सरकार को राजकोषीय घाटे को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाने की जरूरत है।
वह भी ऐसे वक्त में जब दूसरी लहर में संक्रमण दर में तो गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन अभी तीसरी लहर की आशंका भी बलवती हो रही है। राहत की बात है कि मानसून ने देश में दस्तक दे दी है और उसके सामान्य होने की बात कही जा रही है। नहीं भूलना चाहिए कि कोरोना महामारी के दौरान केवल कृषि क्षेत्र ही वह सेक्टर था, जिसने चारों तिमाही के दौरान साढ़े तीन से साढ़े चार फीसदी की विकास दर बनाए रखी। बाकी सेवा क्षेत्र, पर्यटन, विनिर्माण व उद्योगों में तेजी से गिरावट दर्ज की गई थी।
आकलन किया गया है कि देश में दूसरी लहर के दौरान एक करोड़ रोजगार खत्म हुए हैं । इस दौरान 97 फीसदी लोगों की आय में गिरावट आई है। निश्चित रूप से अर्थव्यवस्था को महामारी से पूर्व की स्थिति में लौटने में कुछ समय लगेगा। ऐसे में सरकार की कोशिश होनी चाहिए कि आय के नये स्रोत तलाशे और आम आदमी के हाथ में ज्यादा नकदी पहुंचाने की व्यवस्था करे ताकि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद मिल सके।
