दो केस उलझे तो एसएसपी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आंकड़े निकलवाए
अनिल कुमार, बरेली। किसी भी घटना में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम मानी जाती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही पुलिस घटना की जांच सही दिशा में करती है, लेकिन पिछले सप्ताह दो मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस की जांच की दिशा बिल्कुल उलट गई। जिस घटना को पुलिस आत्महत्या मान रही थी, उसे पोस्टमार्टम …
अनिल कुमार, बरेली। किसी भी घटना में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम मानी जाती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही पुलिस घटना की जांच सही दिशा में करती है, लेकिन पिछले सप्ताह दो मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस की जांच की दिशा बिल्कुल उलट गई। जिस घटना को पुलिस आत्महत्या मान रही थी, उसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद हत्या माना गया और जिसे हत्या मान रही थी, उसे आत्महत्या माना गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पहले भी केस उलझ गए और पुलिस कार्रवाई नहीं कर पायी। कई मामलों में पुलिस ने ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद केस बंद कर दिया, जबकि परिजन हत्या का आरोप लगाते रहे। पिछले सप्ताह दो मामलों के बाद जब एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने पुलिस रिकॉर्ड से पोस्टमार्टम रिपोर्ट का आंकड़ा निकाला तो चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई। जिले में औसतन दो हजार पोस्टमार्टम होना पाया गया। इससे साफ है कि औसतन रोजाना पांच से छह पोस्टमार्टम होते हैं।
एक सप्ताह पहले कोतवाली थाना अंतर्गत सिविल लाइंस स्थित मंदिर परिसर में किशोर महंत फंदे पर लटका मिला था। पुलिस इसे आत्महत्या मान रही थी लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या कर शव लटकाने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने दोबारा पैनल से पोस्टमार्टम कराया तो फिर इसे आत्महत्या माना गया। इस केस में अब पुलिस फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। दो दिन बाद इज्जतनगर में दिव्यांग का शव घर में फंदे पर लटका मिला।
इस मामले को पुलिस हत्या मानकर जांच कर रही थी लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में केस आत्महत्या की ओर चला गया। इस मामले में भी पुलिस जांच कर रही है। इससे पहले भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट न होने से मामलों की जांच अटक गई। अधिकांश मामलों में विसरा सुरक्षित किया जाता है। विसरा की रिपोर्ट देर में आती है। इसकी वजह से भी मामलों की जांच काफी दिनों तक अटकी रहती है।
कुछ महीने पहले नरियावल में ई-रिक्शा चालक की पीट-पीटकर हत्या की गई थी लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं आया। चार साल पहले मीरगंज के सैजना गांव में तीन बहनों की तालाब में डूबने के मामले की जांच भी उलझ गई थी। जनवरी में शीशगढ़ में एक किसान का जला शव पेड़ से कटीले तारों से बंधा मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस ने इसे आत्महत्या मान लिया था। इस तरह से कई मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस की जांच ठंडे बस्ते में चली गई।
2018 में सबसे अधिक पोस्टमार्टम
एसएसपी ने बीते चार सालों के पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आंकड़े निकलवाए तो सबसे ज्यादा पोस्टमार्टम वर्ष 2018 में हुए। इस वर्ष में 2041 पोस्टमार्टम हुए। वर्ष 2019 में कुछ कम 1977 पोस्टमार्टम हुए। वर्ष 2020 में 1701 और 2021 में अब तक 675 पोस्टमार्टम हो चुके हैं। बीते दो वर्षों में पोस्टमार्टम की संख्या में कमी की वजह कोरोना बताया जा रहा है, क्योंकि इस दौरान हादसे व अपराध की घटनाएं भी कम हुईं। मंडल के जिलों के भी पोस्टमार्टम होते हैं लेकिन इनमें अधिकांश हादसों से जुड़े होते हैं।
