समय तैयारियों का

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Edited By Amrit Vichar
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देश धीरे-धीरे कोरोना महामारी की दूसरी लहर से उबर रहा है। ध्यान रखना होगा कि कोरोना अभी समाप्त नहीं हुआ है। यानि खतरा अभी टला नहीं है। ऐसे में पहली लहर के बाद जो लापरवाही हुईं, उनके प्रति भी हमें सजग रहना होगा। अब समय कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच उससे निपटने …

देश धीरे-धीरे कोरोना महामारी की दूसरी लहर से उबर रहा है। ध्यान रखना होगा कि कोरोना अभी समाप्त नहीं हुआ है। यानि खतरा अभी टला नहीं है। ऐसे में पहली लहर के बाद जो लापरवाही हुईं, उनके प्रति भी हमें सजग रहना होगा। अब समय कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच उससे निपटने की तैयारियों का है। देश के कई वरिष्ठ वैज्ञानिक कह चुके हैं कि कोरोना की तीसरी लहर का आना तय है।

विषाणु विज्ञानी डॉ. रवि ने कहा है कि तीसरी लहर में बच्चों के चपेट में आने की ज्याादा आशंका है। आखिर इस तरह के दावों का क्या आधार है? कई एशियाई देश पहले से कोरोना की तीसरी लहर से जूझ रहे हैं। कई पश्चिमी देशों में चौथी लहर आ चुकी है। ऐसे में भारत इससे अछूता रहेगा, यह मान लेना गलत होगा। पहली लहर के दौरान कोरोना ने मुख्य रूप से बुजुर्गों को प्रभावित किया। दूसरी लहर ने युवाओं को शिकार बनाया।

तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की आशंका है। देश में अभी करीब 30 करोड़ बच्चे हैं। इनमें से एक फीसदी बच्चेे भी संक्रमित हुए तो तकरीबन तीन लाख बच्चों पर असर पड़ेगा। इसलिए पहले से तैयारी जरूरी है। बच्चों की सुरक्षा के लिए देश में एक राष्ट्रीय कार्यबल गठित करने की जरूरत है। केंद्र और राज्य सरकारों को नीतियां बनाते समय बच्चों की ओर विशेष ध्यान देना होगा।

याद रखना होगा कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान हमारी स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्गति उजागर हो गई है। बेड और आक्सीजन के अभाव में हजारों लोगों ने अस्पतालों के बाहर दम तोड़ दिया। गरीब, वंचित और आम व्यक्ति को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल पाएं, इसके लिए स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत बनाना होगा। स्वास्थ्य संसाधन बढ़ाने पड़ेंगे।

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा देने की मांग की है। स्वास्थ्य को संवैधानिक अधिकार का दर्जा दिया जाना, समय की जरूरत है। यदि स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाया जाता है तो इससे पूरे स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत किया जा सकता है। लोगों में जो निराशा, डर और अनिश्चितता छा रही है, उनमें एक सकारात्मक संदेश भी जाएगा।

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि बच्चों पर संक्रमण का खतरा बढ़ा है। बच्चों का टीकाकरण भी उतना ही जरूरी है, जितना अन्य आयुवर्ग का। इस बीच दिल्ली व पटना के एम्स में बच्चों पर टीके के परीक्षण का काम शुरु हो चुका है। जरूरी है कि तीसरी लहर से पहले बच्चों का टीकाकरण शुरु हो जाए।