बढ़ती सैन्य मौजूदगी
कोविड-19 मानव जाति की अब तक की सबसे भयानक आपदा है। पूरी दुनिया इस वैश्विक महामारी से जूझ रही है। ऐसे में भी भारत को चीन के आक्रामक रवैये का सामना करना पड़ रहा है। इससे भारत की परेशानी बढ़ी ही है। चीनी सेनाएं भारत की सीमाओं पर लगातार अपनी तैनाती को बढ़ाती ही रही …
कोविड-19 मानव जाति की अब तक की सबसे भयानक आपदा है। पूरी दुनिया इस वैश्विक महामारी से जूझ रही है। ऐसे में भी भारत को चीन के आक्रामक रवैये का सामना करना पड़ रहा है। इससे भारत की परेशानी बढ़ी ही है। चीनी सेनाएं भारत की सीमाओं पर लगातार अपनी तैनाती को बढ़ाती ही रही हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी दुनिया की महाशक्तियों के बीच भी चर्चा का प्रमुख बिंदु बन गई है।
चीन के नापाक इरादों को दुनिया देख रही है। पिछले दिनों अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि चीन क्षेत्र में बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दोनों ‘जिम्मेदार नेता’ हैं, जो दोनों देशों के बीच मुद्दों का आपसी बातचीत कर समाधान करने में सक्षम हैं।
पुतिन ने जो कुछ कहा है उसे समझने की जरूरत है। विश्व के किसी भी जिम्मेदार राष्ट्राध्यक्ष की यही चाहत होगी कि एशिया की दोनों महाशक्तियों के बीच शिखर स्तर पर वार्ता जल्द ही प्रारंभ हो जाए। जब वार्ता चालू होगी तो कोई ठोस नतीजे सामने आ ही जाएंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग चाहें तो भारत-चीन संबंध मधुर हो सकते हैं। वे सीमा पर तनाव और झड़प के बावजूद चुप ही रहते हैं। पहले डोकलाम और फिर लद्दाख में दोनों देशों के सैनिकों के बीच तेज झड़पें भी हुईं।
शी जिनपिंग वर्ष 2019 के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए भारत आए थे। दोनों देशों ने कारोबार, निवेश और सेवा क्षेत्र से जुड़े विषयों पर एक नया तंत्र स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की थी। तब मोदी-शी जिनपिंग के बीच चर्चा के बाद लगा था कि अब दोनों देशों के बीच सहयोग का नया युग शुरू होगा। तब चीनी राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन पर कदम उठाने का भरोसा दिया था। फिर डोकलाम तथा लद्दाख की घटनाओं ने दोनों देशों के संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
द्विपक्षीय संबंधों में तनाव का कारण सीमा विवाद ही रहता है। इसलिए अब लंबित सीमा विवाद, हल करना जरूरी है। भारत चीन से बराबरी के संबंध चाहता है। भारत चाहता है कि भारत-चीन के आपसी व्यापारिक संबंध और बढ़ें। यही दोनों देशों के हित में भी है। चीन सीमा विवाद को दूर करके व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देने का काम कर सकता है। इसके लिए चीन को अपनी विस्तारवादी नीति को छोड़ना होगा।
