बरेली: सीजन गया बेकार, कपड़ा कारोबारियों को ग्राहकों का इंतजार

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण कम होने पर सप्ताह में पांच दिन अनलॉक के बाद भी जिले के कपड़ा दुकानदारों को ग्राहकों का इंतजार है। इसकी वजह त्योहार और शादी का सीजन समाप्ता होना है। दुकानों पर ग्राहक काफी कम संख्या में आ रहे हैं, क्योंकि सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में ही इक्का-दुक्का शादियां हो रही …

बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण कम होने पर सप्ताह में पांच दिन अनलॉक के बाद भी जिले के कपड़ा दुकानदारों को ग्राहकों का इंतजार है। इसकी वजह त्योहार और शादी का सीजन समाप्ता होना है। दुकानों पर ग्राहक काफी कम संख्या में आ रहे हैं, क्योंकि सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में ही इक्का-दुक्का शादियां हो रही हैं। बड़े शोरूमों पर भी गिने-चुने ग्राहक आ रहे हैं। दुकानदारों ने आगामी चार से पांच महीने में बेहतर कारोबार की उम्मीद जताई है। कुछ महीने बाद फिर से त्योहार व शादियों का सीजन शुरू होगा।

रेडीमेड कपड़ा कारोबारियों के अनुसार जिले में 40 बड़ी दुकानें और 240 थोक विक्रेता के अलावा करीब एक हजार फुटकर कारोबारी हैं। करीब दो दर्जन बड़े शोरूम भी हैं। करीब 80 हजार लोग इस कारोबार से जुड़े हैं।

मंडल के अलावा अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में खरीदार यहां आते हैं। जिले से रेडीमेड कपड़ा पीलीभीत, लखीमपुर, कासगंज, शाहजहांपुर समेत कई अन्य जिलों में भी जाता है। कारोबारियों के मुताबिक साल भर की कमाई करने वाला ईद, अक्षय तृतीया, सहालग का सीजन चला गया। बाहर के गिने-चुने दुकानदार आ रहे हैं। अब तक करीब पांच सौ करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है।

सहालग और गर्मी का मौसम कमाई का सीजन होता है। सीजन के दौरान इस बार कोरोना के चलते कारोबार नहीं हुआ। लाकडाउउन में छूट मिलने के बाद भी दुकानदारी नहीं चल रही है। ग्राहकों की संख्या नाममात्र है। कर्मचारियों का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है। – फुरकान हुसैन, रेडीमेड कपड़ा कारोबारी

पिछले साल भी लाकडाउन के चलते कारोबार चौपट रहा था। इस बार भी यह स्थिति रही। लगन और ईद पर कपड़ों की बंपर खरीदारी होती है। यह दोनों कमाई के मौके चले गए। अब यही हालत रहेगी तो कारोबार पटरी पर आने में करीब एक साल तक लग जाएगा।- दर्शनलाल भाटिया, रेडीमेड कपड़ा कारोबारी

लाकडाउन की बंदिशे हट भी गईं फिर भी रेडीमेड कपड़ों का कारोबार बहुत अच्छा नहीं है। कारण यह है कि ग्राहक इक्का-दुक्का आ रहे हैं। त्योहारी सीजन निकल चुका है। हालत यही रहेगी तो कपड़ों के कारोबारियों को अपना कारोबार बदलना पड़ सकता है। -केपी गंगवार, फुटकर कपड़ा विक्रेता

कोरोना की पहली लहर में हुए नुकसान की भरपाई हो भी नहीं सकी थी, अब दूसरी लहर ने कारोबार को फिर चौपट कर दिया। मई में लगन छूट जाने से हुए नुकसान की भरपाई इस साल संभव नहीं लगती। थोड़ी बहुत चल रही दुकानदारी अब बारिश में थमने वाली है।-संजय शर्मा, थोक कपड़ा विक्रेता

संबंधित समाचार