बरेली: हादसे ने छीना हाथ, हौसले ने जिंदगी बना दी आत्मनिर्भर

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मोहित कुमार सिंह, बरेली। कभी-कभी जीवन में ऐसे हादसे होते हैं जो हमारी जिंदगी बदलकर रख देते हैं। ऐसा ही एक हादसा हुआ सुभाषनगर क्षेत्र के अनुपम नगर के रहने वाले अरविन्द कुमार साहू के साथ। साल 2007 में ट्रेन से उतरने के दौरान पैर फिसल जाने से अरविन्द का हाथ कट गया। इंसान भगवान …

मोहित कुमार सिंह, बरेली। कभी-कभी जीवन में ऐसे हादसे होते हैं जो हमारी जिंदगी बदलकर रख देते हैं। ऐसा ही एक हादसा हुआ सुभाषनगर क्षेत्र के अनुपम नगर के रहने वाले अरविन्द कुमार साहू के साथ। साल 2007 में ट्रेन से उतरने के दौरान पैर फिसल जाने से अरविन्द का हाथ कट गया। इंसान भगवान से दुआ भी करता तो दोनों हाथ उठाकर ऐसे में एक हाथ के सहारे पूरी जिंदगी गुजारना कितना मुश्किल होगा इसका केवल अंदाजा लगाया जा सकता है। पिछले लाकडाउन से 35 वर्षीय अरविन्द सड़क पर अपने दो पहिया वाहन पर रखकर छोले-भटूरे बेंच रहे हैं।

वह बताते हैं कि हाथ तो पहले ही गवा चुके थे। लेकिन उम्मीद न गंवाने की ठानी और एक हाथ से ही सारे काम करने शुरू कर कर दिए। अरविन्द दसवीं पास हैं अधिक पढ़ाई लिखाई नहीं कर पाये। जब हाथ नहीं कटा था तो चाट का ठेला लगाते थे। फिर एक दुकान पर काम करने लगे लेकिन लाकडाउन में वह दुकान भी बंद हो गई थी। तो दोपहिया वाहन पर ही छोले भटूरे और राजमा चावल बेचने लगे। अरविन्द की चार बेटियां हैं। 2011 में शादी हुई तो पत्नी सुनीता देवी का पूरा साथ मिला। भगवान ने उनसे एक हाथ छीन लिया तो पत्नी के रूप में दूसरा हाथ दे दिया। एक हाथ से दो पहिया वाहन चलाने के सवाल पर वह कहते हैं कि जब ठोकर लगती है तो इंसान काफी कुछ सीख जाता है।

यही वजह कि वह एक हाथ से ही अपने घर का गुजारा चला रहे हैं। दिनभर में 250 से 300 रुपए ही कमा पाते हैं। जबकि दुकान पर काम करने के दौरान 400 रुपए की मजदूरी मिल जाती थी। अरविन्द ने पूछने पर बताया अभी तक किसी भी जनप्रतिनिधि से उनको सहयोग दिया है। विकलांग कोटे से 300 रुपए महीना पेंशन मिलती है। वह भी 6 महीने में एक बार आती है। ऐसे में घर का गुजारा चलाना मुश्किल होता है। चार बेटियों की पढ़ाई और फिर बड़े होने पर शादी की फिक्र सताती है।

किस्मत ने उनके साथ जो किया इस पर अरविन्द कहते हैं कि जो होना था वो हो गया। इंसान को ऐसे हालातों में हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। उनका एक हाथ भले ही न हो लेकिन वह अपने घर के लिए जितना भी हो सकता उतना करते हैं। दूसरे लोगों को भी ऐसे विषम परिस्थियों का डटकर सामना करना चाहिए।

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