सही फैसला देर से

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Edited By Amrit Vichar
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देश में कोरोना के मामले लगातार घट रहे हैं। महामारी की दूसरी लहर धीमी पड़ गई है। तब सरकार ने कोविड सामानों पर टैक्स घटाने का फैसला किया है। इस फैसले को कोरोना की तीसरी लहर से पहले सरकार का बड़ा फैसला माना जा रहा है। कोरोना काल में कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टी शासित …

देश में कोरोना के मामले लगातार घट रहे हैं। महामारी की दूसरी लहर धीमी पड़ गई है। तब सरकार ने कोविड सामानों पर टैक्स घटाने का फैसला किया है। इस फैसले को कोरोना की तीसरी लहर से पहले सरकार का बड़ा फैसला माना जा रहा है। कोरोना काल में कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टी शासित राज्य लगातार कोविड से जुड़े सामानों पर जीएसटी घटाने की मांग कर रहे थे।

गत 28 मई को जीएसटी काउंसिल की बैठक में कोविड-19 वैक्सीन और मेडिकल सप्लाई पर टैक्स कटौती का मुद्दा अनसुलझा रह गया था। बैठक में इस बात पर विवाद हो गया था कि जीएसटी कटौती का फायदा आम आदमी को मिलेगा या नहीं। जीएसटी काउंसिल ने पीपीई किट, मास्क और वैक्सीन सहित कोविड-19 संबंधी जरूरी सामानों पर टैक्स छूट देने के लिए मंत्रियों का एक समूह (जीएमओ) गठित किया था।

जीओएम ने जीएसटी काउंसिल को अपनी रिपोर्ट 7 जून को सौंप दी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर जीएसटी काउंसिल की बैठक में कोरोना इलाज सम्बंधी उपकरणों आदि पर जीएसटी कर को कम किया गया है। इस फैसले को देर से लिया गया सही फैसला कहा जा सकता है। अब तक एबुंलेंस पर 28 फीसदी जीएसटी लगता था यानि सुविधाजनक कार व एंबुलेंस पर एक समान कर था। अब एंबुलेंस पर जीएसटी की दर को घटाकर 12 फीसदी कर दिया है।

सरकार के इस फैसले के समय को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। निस्संदेह कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर भयावह थी और देश का पहले से कमजोर चिकित्सा ढांचा इससे चरमरा गया था। आवश्यक दवाओं का अभाव हो गया और कुछ लोग कालाबाजारी में लगे रहे थे। वास्तविकता यह थी कि उपचार व ऑक्सीजन न मिलने से उपजी बेबसी, श्मशान घाटों पर शवों का दबाव व गंगा में तैरती व घाटों पर दफन लाशों की संख्या सरकारी आंकड़ों से मेल नहीं खा रही थी।

महामारी के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की आय घटी और उनका रोजगार छिना। जिन लोगों ने इस आपदा के संकट को झेला है, उनके प्रति सरकार की जवाबदेही तो बनती ही है। सरकार ने यह फैसला उस समय क्यों नहीं किया। अब जब धीरे-धीरे जनजीवन सामान्य हो रहा है, सरकार को आम आदमी को राहत पहुंचाने वाले फैसले तेजी से करने होंगे।

सरकार आवश्यक वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित करे। कोरोना काल में 21 बार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ाई जा चुकी है। इस कारण महंगाई भी आसमान छू रही है। लोग परेशान है, फिर भी केन्द्र व राज्य सरकारें इस ओर ध्यान नहीं दे रही हैं, जो दुखद है।