हल्द्वानी: कोरोनाकाल में कम गूंजी किलकारी, 60 प्रतिशत अस्पताल में हुए प्रसव

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नरेन्द्र देव सिंह, हल्द्वानी। कोविडकाल शुरू हुए एक साल से ज्यादा का समय का हो गया है। इस दौरान करीब तीन माह का लॉकडाउन भी लग चुका है। लॉकडाउन लगने के साथ ही कुमाऊं के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र राजकीय महिला अस्पताल में होने वाले प्रसवों की संख्या कम हो जाती है। यह गिरावट सामान्य दिनों …

नरेन्द्र देव सिंह, हल्द्वानी। कोविडकाल शुरू हुए एक साल से ज्यादा का समय का हो गया है। इस दौरान करीब तीन माह का लॉकडाउन भी लग चुका है। लॉकडाउन लगने के साथ ही कुमाऊं के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र राजकीय महिला अस्पताल में होने वाले प्रसवों की संख्या कम हो जाती है। यह गिरावट सामान्य दिनों की अपेक्षा करीब 100 से 150 तक हो जाती है।

कोविड का असर देखते हुए इस साल अप्रैल माह से लॉकडाउन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। जिसका असर महिला अस्पताल में होने वाले प्रसवों की संख्या पर भी पड़ा। यहां आम दिनों में हर माह औसतन 400 प्रसव होते हैं। जबकि अप्रैल में माह में प्रसवों की संख्या केवल 286 रही। इनमें सामान्य प्रसव 161 और आपरेशन से हुए प्रसव 125 रहे। मई में होने वाले प्रसवों की संख्या 306 हुई और इनमें सामान्य प्रसव 208 और आपरेशन से हुए प्रसव 118 रहे।

यही नहीं इन दोनों ही माह में 467-467 गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड हुए। जबकि सामान्य दिनों में अल्ट्रासाउंड की सुविधा सामान्य रहने पर करीब 700 महिलाओं का अल्ट्रासाउंड हो अस्तपताल में हो जाता है। इधर डॉक्टरों का कहना है कि कोविडकाल में जब कोरोना चरम पर होता है तब लोग घरों से कम बाहर निकलते हैं। इस दौरान सामान्य प्रसव के लिए घर को ही प्राथमिकता देते हैं। खासतौर से ग्रामीण इलाकों के लोगों का प्रसव के लिए अस्पतालों में आना कम हो जाता है। हालांकि गंभीर मामलों में प्रसवों के लिए अस्पतालों को ही वरियता दी जाती है।

पिछले एक साल में महिला अस्प्ताल में हुए प्रसवों की संख्या

माह, प्रसव
2020 अप्रैल, 331
2020 मई, 264
2020 जून,  342
2020 जुलाई, 405
2020 अगस्त,  444
2020 सितंबर, 467
2020 अक्टूबर, 435
2020 नवंबर, 429
2020 दिसंबर, 436
2021 जनवरी, 398
2021 फरवरी, 339
2021 मार्च,  434
2021 अप्रैल, 286
2021 मई, 326

कोरोना जब चरम पर होता है, उस समय गतिविधियां कम हो जातीं हैं। लॉकडाउन जैसी स्थिति भी बन जाती है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं का अस्पताल में लिए प्रसव के लिए आना कम हो जाता है। कई मामलों में घरों में ही प्रसव हो जाता है। हालांकि जिन प्रसवों में आपरेशन की जरूरत होती है वह अस्प्ताल में ही हो जाता है।

– डॉ. उषा जंगपांगी, मुख्य चिकित्साधिक्षक, राजकीय महिला अस्पताल, हल्द्वानी

 

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