लखनऊ: 13 साल बाद खुला राज्य सड़क परिवहन निगम में 118 करोड़ का घोटाला
लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में 118 करोड़ रूपये के घोटाले का राजफाश हुआ है। वर्ष 2008 से चल रहे इस खेल में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को बिना टेंडर के हाई स्पीड डीजल आपूर्ति का ठेका निगम के अधिकारियों ने दे दिया, जिसका करार 31 मार्च 2022 तक है। हैरत …
लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में 118 करोड़ रूपये के घोटाले का राजफाश हुआ है। वर्ष 2008 से चल रहे इस खेल में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को बिना टेंडर के हाई स्पीड डीजल आपूर्ति का ठेका निगम के अधिकारियों ने दे दिया, जिसका करार 31 मार्च 2022 तक है।
हैरत की बात यह है कि निगम के उच्च अधिकारियों की साठगांठ से यह घोटाला बसपा सरकार से शुरु होकर सपा और भाजपा सरकार में चलता रहा जिसको कोई जान नहीं पाया। निगम के राजस्व को इतनी बड़ी क्षति पहुंचाई गयी। महालेखाकार कैग की रिर्पोट आने के बाद रोडवेज से लेकर शासन तक हंडकंप मच गया है।
राज्य सड़क परिवहन निगम में हाई स्पीड डीजल से संबंधित 6 पृष्ठों के ऑडिट रिपोर्ट के आधार 118 करोड़ घोटाले की उच्चस्तरीय जांच व कार्यवाही की मांग की गई है। महालेखाकार की रिपोर्ट के अनुसार परिवहन निगम के अधिकारी 2008 से लगातार नियमविरुद्ध नीति अपनाकर एक फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए इतना बड़ा घोटाला कर डाला है इससे प्रदेश सरकार को रु० 90.81 करोड़ की छूट की क्षति और 26.77 करोड़ के सूद की क्षति कुल 117.58 करोड़ की क्षति पहुंची है।
25 लाख से ऊपर के सामान के लिए टेंडर प्रक्रिया है अनिवार्य
महालेखाकार की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश वस्तु के खरीद नियमावली के प्रस्तर 3.4, 3.5(2) और 8.8(1) के अनुसार 25 लाख से ऊपर के सामान क्रय के लिए प्रत्येक दशा में टेंडर प्रक्रिया अपनायी जाना अनिवार्य है, जबकि निगम के अधिकारी इसके विपरीत हाई स्पीड डीजल जो निगम की ओर से प्रत्येक वर्ष लगभग रु० 1000-1200 करोड़ की धनराशि तक क्रय किया गया । 12 सितम्बर 2008 को आईओसी से किये गए करार को लगातार विधिविरुद्ध व नियमविरुद्ध ढंग से आगे बढ़ाया गया और वर्तमान में यह करार 31 मार्च 2022 तक लागू है, जो प्रदेश की निविदा नीति के पूर्ण उल्लंघन में है जो कि निगम के अधिकारियों ने ही निगम को प्रत्येक स्टेज पर भारी क्षति पहुंची है।
- कैग के अनुसार जहां एक तरफ अन्य राज्यों की प्रदेश सरकारों ने हाई स्पीड डीजल सप्लाई के कार्य में पारदर्शिता अपनाते हुये निविदा प्रक्रिया का पालन कर आयल कंपनियों से भारी सहूलियत व रियायत दी, वहीं उत्तर प्रदेश में यह लाभ निगम को मिलने के बजाय अधिकारियों व सिस्टम के हाथो में गया ।
- गौर करने वाली बात तो यह है कि राज्य सड़क परिवहन निगम रोडवेज के अधिकारियों ने डीजल सप्लाई के खेल में शासन के सामने भी झूठे तथ्य प्रस्तुत किये जिससे कोई अन्य कंपनी के सामने नहीं शामिल हो पायी। जबकि इस दौरान सरकारी कंपनी भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लि. और निजी कंपनी एसार समेत तमाम कम्पनियाँ बेहतर दर पर हाई स्पीड डीजल सप्लाई करने को तैयार थीं ।
बसपा, सपा की राह पर भाजपा सरकार, नहीं रोक पा रही भ्रष्टाचार
उत्तर प्रदेश में पारदर्शिता, भष्ट्राचार मुक्त का दलीले देने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार भी बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी की राह पर चल रही है। राज्य सड़क परिवहन निगम रोडवेज में हाई स्पीड डीजल सप्लाई घोटाला वर्ष 2008 बसपा सरकार से शुरु होकर सपा सरकार के दौरान चलता रहा लेकिन खुलासा नहीं हुआ।
ताज्जुब की बात तो यह है 2017 में बीजेपी सरकार बनी तब भी यह भ्रष्टाचार जारी है और आज तक चल रहा है। बसपा के दौरान परिवहन मंत्री रामअचल राजभर रहे। सपा के कार्यकाल के दौरान दुर्गा प्रसाद यादव व गायत्री प्रसाद प्रजापति रहे। वहीं भाजपा के वर्तमान सरकार के दौरान पहले स्वतंत्र देव सिंह और अब अशोक कटारिया है इनको भी पता नहीं चल पाया कि उनके विभाग इतने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार चल रहा है इस पर अंकुश लगाया जाय।
इतने मंत्री बदले व शासन स्तर पर कितने प्रमुख सचिव बदले व निगम में कई प्रबंध निदेशक आते गये लेकिन निगम के अधिकारियों की मिली भगत व सिस्टम का गठजोड़ टूट नहीं पाया यही कारण है कि यह भ्रष्टाचार बड़े फलता फूलता रहा
