खामोशी तोड़ने की कोशिश

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Edited By Amrit Vichar
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जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक अनिश्चितता समाप्त करने की पहल केंद्र की ओर से हुई है। जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने एवं केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के करीब दो साल बाद केंद्र ने 24 जून को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बैठक के लिए जम्मू एवं कश्मीर क्षेत्र के जिन 14 प्रमुख नेताओं को …

जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक अनिश्चितता समाप्त करने की पहल केंद्र की ओर से हुई है। जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने एवं केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के करीब दो साल बाद केंद्र ने 24 जून को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बैठक के लिए जम्मू एवं कश्मीर क्षेत्र के जिन 14 प्रमुख नेताओं को बातचीत का निमंत्रण दिया गया है, उनमें पीडीपी की महबूबा मुफ्ती, नेशनल कॉफ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन और मुजफ्फर हुसैन बेग, सीपीएम के एमवाई तारिगामी, कांग्रेस के जीए मीर और ग़ुलाम नबी आजाद और जेके अपनी पार्टी के अल्ताफ बुखारी शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री के साथ होने वाली इस बैठक में जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रकिया शुरु करने पर बात हो सकती है। बैठक का मुख्य एजेंडा परिसीमन है। यानि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर के भविष्य का फैसला लेते हुए वहां के नेताओं को साथ रखेगी। गौरतलब है कि पृथ्वी का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त 2019 को एक बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने राज्य के विशेष दर्जे के अनुच्छेद 370 को हटा दिया था, साथ ही राज्य का बंटवारा कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेश में तब्दील कर दिया था।

इस फैसले से पहले मोदी सरकार ने सुरक्षा और शांति के नाम पर तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत कई नेताओं को नजरबंद कर दिया गया था। समय बीतने के साथ तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को रिहा कर दिया गया था। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच भी कश्मीर मुद्दा चर्चा का विषय रहा है। यह बैठक क्या बढ़ते हुए अंतर्राष्ट्रीय दबाव का नतीजा तो नहीं है? बैठक में शामिल होने वाले नेताओं फारूक, महबूबा, तारिगामी की ओर से कहा जा रहा है कि हालांकि बैठक का कोई निर्धारित एजेंडा नहीं है, हम विशेष दर्जे की बहाली और राजनीतिक बंदियों की रिहाई सहित अपनी सभी मांगें रखेंगे।

हम केंद्र के किसी भी निर्णय को स्वीकार करेंगे जो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के पक्ष में होगा लेकिन, हम ऐसे किसी भी प्रस्ताव को खारिज कर देंगे, जिसे हम लोगों के हित के खिलाफ मानते हैं। कहा जा सकता है कि बैठक के बाद जम्मू कश्मीर में एक नई राजनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत होगी और यहां के लोगों के वास्तविक सशक्तिकरण के लिए रास्ता तैयार होगा। यह एक तरह से जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक खामोशी को तोड़ने की कोशिश है। साथ ही इससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश जाएगा कि कश्मीर में चीजें सामान्य हैं।