बरेली: कोरोना काल में आरटीई के तहत बढ़े निजी स्कूलों में प्रवेश
बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल में लाकडाउन लगने के बाद आर्थिक रूप से कमजोर हुए अभिभावक अब शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में अपने बच्चों का अधिक से अधिक प्रवेश करा रहे हैं ताकि आर्थिक तंगी की वजह से उनके बच्चों की पढ़ाई में बाधा न आए। नए सत्र में प्रवेश के …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल में लाकडाउन लगने के बाद आर्थिक रूप से कमजोर हुए अभिभावक अब शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में अपने बच्चों का अधिक से अधिक प्रवेश करा रहे हैं ताकि आर्थिक तंगी की वजह से उनके बच्चों की पढ़ाई में बाधा न आए। नए सत्र में प्रवेश के दो चरणों में ही 988 विद्यार्थियों के दाखिले आरटीई के तहत निजी स्कूलों में हो चुके हैं। जबकि, पिछले साल 590 विद्यार्थियों ने ही स्कूलों में दाखिला लिया था।
आरटीई के तहत जिले के आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को उनके आसपास के निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। जिले के सभी निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आरटीई के लिए आरक्षित की गई हैं। नया शैक्षिक सत्र 2021-22 में ऑनलाइन आवेदन का तीसरा चरण 25 जून से शुरू हो रहा है। पहला चरण 2 मार्च से 25 मार्च तक चला जिसमें 1207 बच्चों ने आवेदन किया था। 589 छात्रों का लॉटरी प्रक्रिया से दाखिला हुआ।
दूसरा चरण 6 अप्रैल से 10 जून तक चला जिसमें 973 बच्चों ने ऑनलाइन आवेदन किया। 399 बच्चों को लॉटरी प्रक्रिया के तहत प्रवेश दिया गया। तीसरा चरण 26 जून से 17 जुलाई तक चलेगा। पहले और दूसरे चरण में जिन बच्चों को स्कूल नहीं मिल पाया है, वह बच्चे तीसरे चरण में आवेदन कर लॉटरी प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत अलाभित वर्ग में अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग के बच्चे आवेदन कर सकते हैं।
दुर्बल वर्ग में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले और उनके माता पिता की आय एक लाख से कम होने वाले बच्चे भी आवेदन कर सकते हैं। जिन बच्चों की आयु 3 से 6 साल तक होगी उन्हीं बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। इस सत्र में प्रवेश पाने वाले बच्चों की उम्र की गणना 16 जून 2021 से की जाएगी।
ये है नियम
- 3 से 5 वर्ष की उम्र के बच्चों को नर्सरी में प्रवेश दिया जाएगा
- 5 से 6 साल के बच्चों का कक्षा 1 में प्रवेश दिया जाएगा।
- उम्र की गणना 16 जून 2021 से की जाएगी।
- 20 विद्यालयों में पिछले साल लिए गए थे शिक्षा का अधिकार अधिनियम तहत प्रवेश।
